डबरा में बच्ची की हत्या के दोषी की फांसी की सजा टली, अब काटेगा उम्रकैद, ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने माना कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर थी, लेकिन मृत्युदंड के लिए आवश्यक ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मानदंड इस मामले में पूरा नहीं होता। सजा पर व...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 12:25:42 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 12:26:09 PM (IST)
एआई से बना चित्र।HighLights
- 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी से बाहर
- आरोपी की पृष्ठभूमि और जेल में सुधरा व्यवहार
- बच्ची से हत्या के मामले में मिला फैसला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। डबरा में सात वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में दोषी शेरू जाटव को हाईकोर्ट से फांसी की सजा से राहत मिली है, लेकिन वह जेल से बाहर नहीं आएगा। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के मृत्युदंड को बदलकर उम्रकैद में तब्दील किया है, जिसमें दोषी को जीवनभर जेल में रहना होगा।
अदालत ने माना कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर थी, लेकिन मृत्युदंड के लिए आवश्यक ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मानदंड इस मामले में पूरा नहीं होता। सजा पर विचार करते हुए कोर्ट ने दोषी की व्यक्तिगत परिस्थितियों और जेल में उसके आचरण को भी महत्व दिया।
बीपीएल श्रेणी में दोषी शेरू का परिवार
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अमन सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए सिद्धांतों का उल्लेख किया गया। जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, 27 वर्षीय शेरू जाटव कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आता है। उसका परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान में रहता है और बीपीएल श्रेणी में है। जेल में उसके व्यवहार को अनुशासित और सुधार की दिशा में बताया गया।
यह मामला 6 फरवरी 2023 का है, जब करहिया थाना क्षेत्र के एक गांव में शादी समारोह के दौरान बच्ची लापता हो गई थी। परिजनों की तलाश के बाद पुलिस ने 7 फरवरी 2023 को खेत से बच्ची का शव बरामद किया। निचली अदालत ने शेरू जाटव को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया है।