वरुण शर्मा नईदुनिया, ग्वालियर। चंबल नदी में रेत के अवैध उत्खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रूख के बाद अब प्रदेश के परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने अपने ही विभाग के आयुक्त उमेश जोगा को एक पत्र लिखकर विभाग की दिखावटी कार्रवाई सामने रखी है। 20 मई से 26 मई तक सात दिन भिंड, मुरैना और श्योपुर में परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जिन वाहनों को गंभीरता से पकड़कर कार्रवाई करना थी उन्हें शमन शुल्क लेकर छोड़ दिया गया।
जिलावार एक एक जिले की कार्रवाई को बिंदुवार बताया गया है। वहीं अब तीनों जिलों के अधिकारियेां को निर्देश दिए हैं कि सुस्त कार्रवाई करने वाले अफसरों पर कार्रवाई शुरू कर दी जाए। इसके अलावा 26 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित किया जाए। इन तीन जिलों में पदस्थापना के बाद भी ज्वाइनिंग न देने वाले कर्मचारियों को तत्काल दो दिन में ज्वाइन करने को कहा जाए वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई कर निलंबित कर दिया जाये। उप परिहवन आयुक्त किरण शर्मा को चंबल मुख्यालय में तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं। परिवहन आयुक्त को खुद भी चंबल क्षेत्र में भ्रमण के आदेश दिए गए हैं।
भिंड में भी इसी प्रकार बिना नंबर प्लेट के 28 वाहनों जो अधिकाशंत ट्रक श्रेणी के हैं प्रत्येक पर रूपये 500 का शमन शुल्क लगाकर छोड़ दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश... यह जल्द हो कार्रवाई
खनिज गतिविधियों में संलग्न सभी वाहन ट्रैक्टर, ट्राली, डंपर, लोडर, ड्रैगर एवं अन्य मशीनरी जो बिना रजिस्ट्रेशन, फर्जी अथवा छेड़खानी युक्त नंबर प्लेट, बगैर नंबर प्लेट अधिनियम के उल्लंघन स्वरूप है, ऐसे सभी वाहनों को तत्काल सड़क पर रोका जाये, जप्त किया जाए तथा राजसात करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
मौके के अलावा अतिरिक्त जहां स्टेटिक पांइट हैं, वहां सीसीटीवी.कवरेज किया जाए। खनिज परिवहन में संलग्न वाहन जो उल्लंघन कर रहे हों, उनके ड्राइवर का नाम पता/वाहन स्वामी का नाम पता की सूची प्रतिदिन बनाकर संबंधित जिला दण्डाधिकारी को जिला परिवहन अधिकारी द्वारा लिखित में सूचित करे, तथा इस पत्र की प्रतिलिपि संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को भी दी जाए। इससे कार्रवाई में सहयोग होगा।
अगले 24 घंटे में यह शुरू करने के निर्देश
जिन वाहनों में नंबर प्लेट जिला श्योपुर, जिला मुरैना एवं जिला भिण्ड के नहीं होना पाया गया एवं उन्हें मात्र शमन शुल्क लेकर छोड़ दिया गया है। उनमें संबंधित अधिकारी के द्वारा त्रुटि की गई है। अतः ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही तत्काल प्रारंभ की जाए।
मुरैना में रेत उत्खनन पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
चंबल नदी से हो रहे रेत के अवैध उत्खनन, रेत खनन के कारण जलीयजीवों को हो रहे खबरे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। अब तक सुप्रीम कोर्ट मप्र, राजस्थान और उप्र सरकार से नाराजगी जता रहा था। 26 मई को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर सरकार के हलफनामों को झूठा बताया। दरअसल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्ट पेश कर दीं, जिनमें सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी चंबल के घाटों से हो रहे अवैध उत्खनन, रेत के अवैध परिवहन की खबरें थीं।
इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए 29 मई को केवल मुरैना जिले के संबंध में सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है। तीनाें राज्यों की सुनवाई 22 जुलाई को होगी। मुरैना को लेकर हो रही सुनवाई से पहले कलेक्टर-एसपी ने चंबल के घाटों से लेकर उन रास्तों का निरीक्षण किया जहां से रेत परिवहन होता है। बिना नंबर के वाहनों पर सख्ती की गई है। कई जगह रेत के स्टाक नष्ट करवाए गए हैं। आज होने वाली सुनवाई में इसी कार्रवाई के आंकड़े मुरैना वन विभाग, पुलिस व राजस्व विभाग रखेगा।