
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बीते एक दशक में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बड़ी है। ई-रिक्शा, दोपहिया से लेकर अब कारों और बसों की मांग भी बड़ी है। ईवी वाहनों का रजिस्ट्रेशन परिवहन विभाग में करना अनिवार्य है, लेकिन फिटनेस और परमिट का नियम नहीं है। ऐसे में इंदौर में पंजीकृत 12 हजार से अधिक ई-रिक्शा बगैर परमिट और फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। चालक मनमाने तरीके से बदलाव कर ई-रिक्शा दौड़ाते रहते हैं।
शहर में बीते दिनों कार में चार्जिंग के दौरान आग की घटना के अलावा ई-रिक्शा में भी ब्लास्ट हो चुका है और एक महिला की मौत हो चुकी है। इसकी जांच में सामने आया था कि चालक ने दो बैटरियां आपस में जोड़ रखी थी। नियमों की अनदेखी और उल्लंघन की जांच नहीं होने से इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। दरअसल 250 वॉट से अधिक पावर जनरेट करने वाली और 25 किमी प्रति घंटे से अधिक स्पीड से चलने वाले ईवी वाहनों के लिए परिवहन कार्यालय में पंजीयन अनिवार्य है।
इन वाहनों को चलाने के लिए लाइसेंस भी अनिवार्य है, लेकिन फिटनेस और परमिट की अनिवार्यता नहीं है। वाहन पोर्टल पर ईवी वाहनों के फिटनेस आवेदन नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ईवी चालक इनके फिटनेस नहीं कराते है। शहर में दौड़ रहे कई ई-रिक्शा को तो दो साल से अधिक समय हो गया है, इसके बावजूद फिटनेस नहीं कराया। वहीं इनकी बैटरी की जांच भी नहीं हुई। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि ईवी वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है, लेकिन परमिट नहीं होता है। ई-रिक्शा का फिटनेस भी नहीं हो रहा है।
टैक्स में भी छूट 20 लाख से कम मूल्य के ईवी वाहनों का टैक्स पूरी तरह से फ्री है। वहीं इससे अधिक मूल्य के वाहनों को सिर्फ 4 प्रतिशत ही टैक्स देना होता है। इंदौर में अब तक 74 हजार 445 ईवी पंजीकृत हो चुके है। इसमें 2024 में 19144, 2025 में 23314 ईवी वाहन पंजीकृत हुए थे। इस साल भी जनवरी से अब तक 5238 वाहन पंजीकृत हो चुके है।