

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : प्रदेश में रोजाना 130 से ज्यादा बच्चियां और महिलाएं लापता हो रहे हैं। स्थिति पूरे प्रदेश में एक जैसी है। लापता हो चुके लोगों की संख्या हजारों में हैं। बावजूद इसके शासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।
जिन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी है वे इस पर ध्यान नहीं दे रहे। आंकड़े सार्वजनिक करने के बजाय इसे छुपाया जा रहा है। गुरुवार को इस संबंध में प्रस्तुत जनहित याचिका में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य और केंद्र शासन सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका अभिजीत पांडेय ने एडवोकेट शुभम मांडिल के माध्यम से दायर की है। कहा है कि इंदौर सहित पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे लापता हो रहे हैं, लेकिन उनकी तलाश, जांच और निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं है। प्रदेश में प्रतिदिन 130 महिलाएं और बच्चे लापता हो रहे हैं।
याचिका में यह भी कहा है कि याचिका किसी व्यक्तिगत विवाद को लेकर नहीं बल्कि महिलाओं और बच्चों के जीवन, सुरक्षा और गरिमा के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रस्तुत की गई है। लापता महिलाओं और बच्चों के मामले मानव तस्करी, शोषण, यौन अपराध और अन्य गंभीर अपराधों से जुडे हो सकते हैं, इसलिए तत्काल और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
याचिका में आंकडों के माध्यम से स्थिति की भयावहता बताई गई है। कहा है कि वर्ष 2023 से पहले तक प्रदेश में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या 35000 थी, लेकिन वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 74 हजार पर पहुंच गया। इसी तरह वर्ष 2023 तक प्रदेश में गायब होने वाली बच्चियों की संख्या 3926 थी जो वर्ष 2023 में 16 हजार 17 पर पहुंच गया।
आंकडे बताते हैं कि वर्ष 2023 में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या के हिसाब से मप्र देश में पहले स्थान पर था जबकि बच्चियों के गायब होने के मामले में देश में चौथे स्थान पर। याचिका में सरकारी जवाब का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक पूरे प्रदेश से 2,74,311 महिलाएं और लडकियां लापता हुईं।
इसका मतलब है कि राज्य में प्रतिदिन 130 महिलाएं और बच्चियां लापता हो रही हैं। याचिका में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने वर्ष 2023 के बाद लापता महिलाओं और बच्चों से जुड़े आंकड़़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। इस वजह से वर्ष 2024 से 2026 तक लापता हुए लोगों की संख्या उपलब्ध नहीं है।
याचिका में कहा है कि लापता लोगों के बारे में याचिकाकर्ता ने जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, राज्य अपराध रिकार्ड ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो से जानकारी चाही थी, लेकिन संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।
याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में मिसिंग पर्सन को लेकर जारी एडवाइजरी को गंभीरता से लिया जाए। इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। साथ ही राज्य सरकार से वर्ष 2021 से अब तक के मामलों, बरामद हुए लोगों, लंबित मामलों और उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए।
याचिका में यह मांग भी है कि लापता महिलाओं और बच्चों से संबंधित जिलेवार आंकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाएं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट से कहा कि वे सभी विभागों से जानकारी लेकर कोर्ट के समक्ष रखेंगे। मामले में अब सितंबर में सुनवाई होगी।