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उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर शहर की दवा दुकानों से सामान्य बुखार, सर्दी-खांसी की ही नहीं, बल्कि एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरस व एंटी-फंगल दवाएं सहज रूप से दी जा रही हैं। गौरतलब है कि एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानवता के समक्ष बड़ा खतरा बताया है। ऐसे में दवा दुकानों से मरीजों व अन्य लोगों को बिना डॉक्टर के पर्चे के दी जा रही एंटीबायोटिक दवाएं मरीजों की मुश्किलों को बढ़ा रही हैं।
नईदुनिया ने इंदौर के दवा बाजार की दुकानों पर पड़ताल की, तो जब रिपोर्टर ने इन दुकानों से एंटीबायोटिक दवाएं खरीदना चाही, तो दवा विक्रेता डॉक्टर का पर्चा देखे बगैर दवाई देने को तैयार हो गया। इंदौर शहर की दवा दुकानों द्वारा करीब 30 फीसद सामान्य व एंटीबायोटिक दवाएं 'ओवर द काउंटर' बिना डॉक्टर के पर्चे के दी जा रही हैं। इस तरह दवाओं का सेवन कर मरीज व अन्य लोग अपने लिए ही मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
केमिस्ट सिर्फ बुखार, सिरदर्द जैसी दवाएं ही ओवर द काउंटर दे सकते हैं। ड्रग एवं कॉस्मेटिक नियम 1945 के तहत डॉक्टर के पर्चे पर जो भी दवाएं दी जाती हैं, वे शेड्यूल एच व शेड्यूल सी व सी-1 में आती हैं। इसके अलावा एनआरएक्स दवाएं शेड्यूल एक्स में आती हैं। ऐसे में इस तरह विशेष कैटेगरी में आने वाली दवाओं को कोई भी केमिस्ट ओवर द काउंटर बिना पर्चे के नहीं बेच सकता है। कोई भी केमिस्ट बिना पर्चे के वही दवाएं बेच सकता है, जो किसी भी शेड्यूल में नहीं आती हैं। यदि कोई केमिस्ट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
रिपोर्टर: लिवोफ्लोक्सासिन, मॉक्सीफ्लोक्सासिन दवा मिल जाएगी? केमिस्ट: आपको कितनी चाहिए? रिपोर्टर: चार गोली मिल जाएगी? केमिस्ट: हां, मिल जाएगी। रिपोर्टर: डॉक्टर का पर्चा तो नहीं चाहिए? केमिस्ट: आपको दवाई का नाम मालूम है, तो हम दे देंगे।
संदीप पटेल, केमिस्ट: जो व्यक्ति डॉक्टर का पर्चा नहीं लाता है, उसे हम दवा की जानकारी देने पर भी एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं। एनआरएक्स व अन्य विशेष दवा हो तो हम पर्चा जरूर मांगते हैं।
प्रेम कुमार भारेगा, केमिस्ट: अधिकांश समय पर दवा खरीदने वाले व्यक्ति से हम डॉक्टर का लिखा पर्चा मांगते हैं। कई बार लोग हड़बड़ी में पर्चा भूल आते हैं। उन्हें दवाई का नाम मालूम होता है, तो उनकी मजबूरी देखकर एंटीबायोटिक दवा देते हैं।
एंटी-बैक्टीरिया, एंटी-वायरस, एंटी-फंगल जैसी एंटीबायोटिक दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं देनी चाहिए। यदि इसका सही तरीके से डोज नहीं लिया जाए, तो इसके साइड इफेक्ट होते हैं। मरीज द्वारा एंटीबायोटिक दवा का पूरा डोज नहीं लेने पर दवा का असर बैक्टीरिया पर नहीं होता है और उनमें दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। हमने एसोसिएशन से जुड़े सभी केमिस्ट को निर्देशित किया है कि वे मरीजों को एंटीबायोटिक ग्रुप की कैप्सूल व टेबलेट बिना डॉक्टर के पर्चे के न दें। - डॉ. मकरंद शर्मा, सदस्य, इंदौर केमिस्ट एसोसिएशन
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