इंदौर के मुक्ति धाम में 12 सालों से रखी हुई 300 अस्थियों को नर्मदा में किया गया विसर्जित, सूचना के बाद भी नहीं आए परिजन
इंदौर के जूनी मुक्ति धाम पर सात दिवसीय भागवत कथा के समापन के विधि-विधान से ही यहां 12 सालों से रखी गई अस्थियों का विसर्जन किया गया। इससे पहले समिति की ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 31 Jan 2026 01:40:49 AM (IST)Updated Date: Sat, 31 Jan 2026 01:53:10 AM (IST)
300 से अधिक अस्थियों का विसर्जन (AI Generated Image)HighLights
- मुक्ति धाम पर 12 वर्षों से रखी हुई 300 से अधिक अस्थियों का विसर्जन
- विसर्जन से पहले विधि विधान से पूजन कर अस्थि कलश को विदाई दी गई
- समिति की ओर से सूचना देकर दिवंगतों के परिजनों को बताया गया था
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: शहर के पश्चिम क्षेत्र के जूनी इंदौर मुक्ति धाम पर चल रही भागवत कथा के समापन हुआ। इसमें शुक्रवार सुबह मुक्ति धाम पर पिछले करीब 12 वर्षों से रखी हुई 300 से अधिक दिवंगतों की अस्थियों को नर्मदा में विसर्जन के पूर्व विधि विधान से पूजन कर अस्थि कलश को विदाई दी गई।
यह वर्ष 2013 से संग्रहित अस्थियां थी जिन्हें किन्हीं कारणों से उनके परिजन अपने साथ लेकर नहीं जा पाए थे। संयोजक अशोक सारडा एवं राजेश जोशी ने बताया कि आचार्य पं. राजेश तिवारी के निर्देशन एवं भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री के सान्निध्य में विद्वानों ने महामृत्युंजय मंदिर की साक्षी में इन सभी अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से पूजन कर नर्मदा तट पर विसर्जन के लिए विदा किया।
समाजसेवी प्रमोद रामेश्वर खटोड एवं राहुल सोनकर के साथ उनके साथी भी खेड़ीघाट पहुंचे, जहां दोपहर में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोचार के बीच इन अस्थियों का विसर्जन किया गया।
सूचना के बाद भी 300 अस्तियों को लेने नहीं आए परिजन
समिति की ओर से सार्वजनिक सूचना देकर दिवंगतों के परिजनों से आग्रह भी किया गया था कि वे 30 जनवरी तक अपने दिवंगतों की अस्थियाँ मोक्ष धाम से ले जाएं। इस आग्रह के बाद कुछ परिजन तो मोक्ष धाम से अस्थियां लेकर चले गए, लेकिन करीब 300 लोगों की अस्थियां लेने कोई नहीं आया।
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ताकि मिले जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
शास्त्रों में विधान है कि दिवंगतों की अस्थियों को उनके सगे-सम्बन्धियों द्वारा पवित्र नदियों में विसर्जित करना चाहिए तभी उन्हें जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल सकती है। समिति ने दिवंगतों की अस्थियों का विसर्जन कर दिया। शहर के अन्य मुक्ति धामों पर भी इसी तरह अनेक दिवंगतों की अस्थियां रखी हुई हैं। इसके लिए शहर के सामाजिक संगठनों को आगे आने की जरूरत है।