इंदौर में पेयजल जांच में 51 नलकूप फेल, प्रशासन अब 'लाल निशान' लगाकर करेगा आगाह, पीने के उपयोग पर लगी रोक
Indore Water Quality: इंदौर जिले में चलाए जा रहे जल गुणवत्ता अभियान के दौरान स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। जिले के विभिन्न क्षेत् ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 31 Jan 2026 09:32:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 01 Feb 2026 05:51:50 AM (IST)
इंदौर में पेयजल जांच में 51 नलकूप फेल।HighLights
- इंदौर के ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा अभियान
- 51 नलकूप मानकों पर नहीं उतरे है खरे
- अब होगा पानी का शत-प्रतिशत क्लोरिनेशन
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर जिले में चलाए जा रहे जल गुणवत्ता अभियान के दौरान स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की जांच के दौरान 51 नलकूपों का पानी इंसानी खपत के लिए अनुपयुक्त पाया गया है। इन नलकूपों का पानी न केवल लवण युक्त है, बल्कि इसका स्वाद भी मानक स्तर से भिन्न पाया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
लाल रंग से होगी मार्किंग, पीने पर पाबंदी
नलकूपों की इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन सख्त हो गया है। हाल ही में आयोजित 'दिशा' की बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि जिन नलकूपों का पानी फेल हुआ है, उन पर लाल रंग से स्पष्ट मार्किंग की जाए। इस लाल निशान का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण दूर से ही पहचान सकें कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन नलकूपों का उपयोग अब केवल नहाने, कपड़े धोने या अन्य घरेलू कार्यों तक ही सीमित रहेगा।
देपालपुर में सबसे ज्यादा और इंदौर में सबसे कम खराब स्रोत
जल अभियान के तहत जिले भर के कुल 566 नलकूपों से पानी के नमूने लिए गए थे। जांच के बाद इनमें से 515 नलकूप सुरक्षित पाए गए, जबकि 51 नलकूप मानकों पर खरे नहीं उतर सके। विकासखंडवार आंकड़ों को देखें तो देपालपुर की स्थिति सबसे खराब है, जहाँ 20 नलकूप फेल हुए हैं। इसके मुकाबले इंदौर विकासखंड में सबसे कम यानी केवल 8 नलकूप ऐसे मिले जिनका पानी पीने योग्य नहीं है।
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1185 स्रोत अब भी बाकी
जिले के ग्रामीण इलाकों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्लोरिनेशन का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है। जिले के कुल 7579 जलस्रोतों (नलकूप, कुएं और बोरवेल) में से अब तक 6394 (करीब 84 प्रतिशत) का क्लोरिनेशन किया जा चुका है। हालांकि, अभी भी 1185 जलस्रोत ऐसे हैं जहां क्लोरिनेशन होना बाकी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शेष बचे स्रोतों का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके।