
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गर्मियों की छुट्टियों में रालामंडल अभयारण्य से घूमने की योजना बना रहे है तो पर्यटकों को थोड़ी निराशा हो सकती है। कारण यह है कि अभयारण्य में शिकारगाह-जंगल सफारी की वाहनों से सैर करवाने वाली एजेंसी ने सुविधा बंद करने पर जोर दिया है। एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इसके बारे में कहा है।
यहां अगले कुछ दिनों में जंगल सफारी बंद होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अधिकारी एजेंसी की सेवा कुछ दिन और ले सकते है। यहां तक कि नए टेंडर निकाल दिया है। एजेंसी ने सेवा बंद करने के पीछे मुख्य कारण पर्यटकों की घटती संख्या और सफारी वाहनों के रखरखाव में आ रही दिक्कतें बताई गई हैं।
दरअसल सफारी संचालन कर रही मौजूदा एजेंसी ने वन विभाग को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि अब इस काम को जारी रखना उनके लिए संभव नहीं है। एजेंसी का कहना है कि साल के कुछ महीनों को छोड़कर यहां पर्यटकों की संख्या काफी कम रहती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खासतौर पर जनवरी से मार्च के बीच बहुत कम लोग सफारी के लिए आते हैं।
हैरानी वाली बात यह है कि इस एजेंसी का टेंडर 20 जुलाई 2025 को ही खत्म हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद अभयारण्य प्रशासन ने अब तक नई एजेंसी नियुक्त नहीं की। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी नई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
हालांकि मार्च के दूसरे सप्ताह में नया टेंडर जारी किया गया, लेकिन अब तक किसी भी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। रेंजर योगेश यादव का कहना है कि एजेंसी की समयावधि खत्म हो चुकी है। इस संबंध में वनमंडल को कई बार जानकारी भेजी गई है। वैसे नई एजेंसी की तलाश जारी है। टेंडर निकाल दिया है। नई व्यवस्था लागू होने तक पूरानी एजेंसी को सेवा देने पर जोर दिया है।
स्थिति यह है कि फिलहाल एक ही वाहन से शिकारगाह और जंगल सफारी दोनों सुविधाएं दी जा रही हैं, जो व्यवस्थाओं की कमी को दर्शाता है। ऐसे में यदि सफारी पूरी तरह बंद होती है तो पर्यटकों को केवल पैदल घूमकर ही अभयारण्य का अनुभव लेना पड़ेगा। इस पूरे मामले से इंदौर वनमंडल में हड़कंप मचा हुआ है। खासकर इसलिए क्योंकि गर्मियों की छुट्टियां नजदीक हैं, जो पर्यटन के लिहाज से अहम समय होता है। यदि इसी दौरान सफारी बंद होती है तो इसका सीधा असर पर्यटक संख्या और राजस्व पर पड़ेगा।
अभयारण्य के कैफेटेरिया को लेकर भी विवाद सामने आया है। पुरानी एजेंसी की समयावधि खत्म होने के बावजूद उसे दोबारा टेंडर देने पर विचार किया जा रहा है, जिस पर प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत भी की गई है।