
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया टर्मिनल-1 अब भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से पुराने टर्मिनल का नवीनीकरण कर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था।
29 मार्च को केंद्रीय उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका लोकार्पण कर चुके हैं, लेकिन साढ़े तीन माह बाद भी यहां से एक भी उड़ान शुरू नहीं हो सकी है। सुरक्षा बल की कमी संचालन शुरू करने में सबसे बड़ी अड़चन है।
एयरपोर्ट प्रबंधन की योजना थी कि टर्मिनल-1 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और छोटे एटीआर विमानों का संचालन किया जाएगा। इससे मौजूदा टर्मिनल पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा, लेकिन उद्घाटन के बाद भी यह योजना जमीन पर नहीं उतर पा रही है। टर्मिनल पूरी तरह तैयार है, सुविधाएं भी मौजूद हैं, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से यह उपयोग के बजाय धूल खा रहा है।
एयरपोर्ट पर बीते कुछ माह में 18 के करीब छोटे विमानों का संचालन बंद हुआ है। इसकी वजह से ढाई हजार के करीब यात्री संख्या भी कम हो गई है। विमानों और यात्रियों की संख्या कम होने के कारण भी टर्मिनल-1 से उड़ानों का संचालन रुक रहा है।
एयरपोर्ट के पीआरओ रामस्वरूप यादव का कहना है कि संचालन को लेकर सभी अनुमतियां प्राप्त हो चुकी हैं, सुरक्षाबल मिलने के बाद टर्मिनल-1 से उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
इंदौर एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ती यात्री संख्या और उड़ानों के कारण नया टर्मिनल बनाने की जरूरत महसूस की गई थी। हालांकि नई जमीन नहीं मिलने से एयरपोर्ट प्रबंधन ने 2012 में बंद हो चुके पुराने टर्मिनल को ही नए रूप में विकसित करने का फैसला लिया। इसी के तहत पुराने ढांचे को आधुनिक टर्मिनल-1 के रूप में तैयार किया गया। उद्घाटन के समय दावा किया गया था कि अप्रैल से छोटे विमानों का संचालन यहीं से शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हो पाया।
शुरुआत में अधिकारियों ने टर्मिनल शुरू नहीं होने के पीछे ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) की मंजूरी नहीं मिलने का कारण बताया था। अब यह मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन करीब 150 सीआईएसएफ जवानों की तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। सुरक्षा बल की कमी के कारण टर्मिनल-1 शुरू करने की प्रक्रिया अटक गई है।
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