
उदय प्रताप सिंह, इंदौर। भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड के 337 टन कचरे को जलाने के बाद बची 900 टन राख को पीथमपुर की जमीन में दबा दिया गया है। इस तरह अब गैस त्रासदी के कचरे का नामोनिशान मिट गया है। इस राख को पीथमपुर स्थित एनर्जी इन्वायरो कंपनी के ट्रीटमेंट, स्टोरेज, डिस्पोजल फैसिलिटी (टीएसडीएफ) परिसर में जमीन में दबाया गया है।
जमीन से चार फीट ऊंचाई पर पिट बनाकर इस राख को एचडीपीई लाइनर बिछाकर डाला गया और उसे ऊपर से लाइनर से ढंका गया। इसके बाद इसके ऊपर मिट्टी की परत बिछाकर अब पौधारोपण किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक जिस स्थान पर राख को ज़मीन में दबाया गया है, उसकी रहवासी क्षेत्र से दूरी 500 मीटर है।
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में रि एनर्जी इन्वायरो कंपनी के कर्मचारियों ने इंसीनरेटर के पास शेड में रखी 900 टन राख को दो जनवरी से लैंडफील साइट में डालने का काम शुरू किया। आठ जनवरी तक सात दिन में राख को दबाने की प्रक्रिया को पूर्ण किया गया। पश्चात कार्य पूर्णता रिपोर्ट मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दे दी गई है। अब बोर्ड जबलपुर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करेगा।
पीथमपुर के टीएसडीएफ परिसर में जहां राख दबाई गई है, उस आसपास के इलाके में कंपनी व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम हर 15 से 30 दिन के अंतराल पर वायु गुणवत्ता, बोरिंग व जलाशयों के पानी की जांच करेगी। इस जांच से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि राख को लैंडफील में दबाने के पश्चात आसपास के वातावरण में उसके कोई हानिकारक प्रभाव तो नहीं हो रहे।
कोर्ट के निर्देश पर पीथमपुर में टीएसडीएफ परिसर में यूका के कचरे को इंसीनरेटर में जलाने के बाद बची राख को दबा दिया गया है। आठ जनवरी को यह प्रक्रिया पूर्ण हुई है। जहां राख दबाई गई है, उसके आसपास के इलाके में वायु व पानी की गुणवत्ता की निगरानी हम निर्धारित अंतराल पर करेंगे। - अजय मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
भोपाल में दो-तीन दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इसके प्रभाव से हजारों लोगों की मौत हुई थी और भोपाल में रहने वाले पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे।