
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नायता मुंडला बस स्टैंड पर यात्रियों की सुविधा के लाख दावे किए जाएं, लेकिन लोक परिवहन की सुविधा नाममात्र की है। दिन में तो एक-आध बार सिटी बस की सुविधा मिल जाती है, लेकिन रात्रि में सबसे अधिक परेशानी होती है।
बस की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को शहर में घर तक पहुंचने के लिए ऑटो ही एकमात्र विकल्प बचता है। इसका फायदा उठाकर ऑटो चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। बस स्टैंड पर रात 12 बजे तक बसें पहुंचती हैं और इनमें बालिकाओं और महिलाओं की संख्या भी होती है।
नायता मुंडला बस स्टैंड से सुबह 5.30 बजे से बसों का संचालन शुरू हो जाता है और रात्रि 12 बजे बाद तक बसें आती रहती हैं। 80 से अधिक बसों से रोजाना हजारों यात्री यहां पर पहुंचते हैं और इनको शहर में अपने घर तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लोकल परिवहन की सुविधा कम होने से आटो और टैक्सी ही एकमात्र विकल्प बचता है।
ग्रामीण यात्रियों को भी शहर के किराये और रास्तों की ज्यादा जानकारी नहीं होती। ऐसे में वे आटो चालकों की मनमानी के सामने सबसे आसान शिकार बन जाते हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि लोकल बसों की सुविधा बढ़ाई जाएगी। हालांकि अब तक यात्रियों को किसी तरह की राहत नहीं मिली है।
नेमावर से आने वाली नेहा पटेल का कहना है कि वह पांच दिन पहले रात 11.30 बजे नायता मुंडला बस स्टैंड पर उतरी थी।वहां खड़े आटो वालों ने गीता भवन तक के 380 रुपये मांगे। लोकल बस की सुविधा नहीं थी और रात्रि होने से दोपहिया की बुकिंग नहीं कर सकती थी। ऐसे में आनलाइन आटो बुक किया, लेकिन आसपास खड़े आटो वालों ने ही बुकिंग उठा ली। फोन लगाने पर कुछ देर में आने का कहा, लेकिन आए नहीं। आधा घंटा इंतजार के बाद राइड केंसल कर दूसरी बुकिंग की, लेकिन उसने दूर होने से आने से मना कर दिया। बाद अपने रिश्तेदार को फोन लगाया, जो बस स्टैंड लेने पहुंचे और होस्टल तक छोड़ा।
राकेश विश्वकर्मा ने बताया कि बीते सप्ताह परिवार के साथ रात्रि में नेमावर रोड पर उतरे थे। परदेशीपुरा जाने के लिए आटो वाले ने 400 रुपये किराया बताया। मेने कहा कि हर बार 180 से 200 रुपये में आटो वाले छोड़ते है, तो कहा कि रात में इतना ही किराया लगेगा।मेने मीटर से चलने का बोला तो चालक ने मना कर दिया।अधिकांश आटो बिना मीटर के चल रहे हैं। ऐसे में किराये का कोई तय आधार नहीं बचता और यात्रियों से मनमानी वसूली आसान हो जाती है।