भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की सीबीआई जांच पर फैसला टला, 23 मार्च को होगी अगली सुनवाई
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में सीबीआई जांच की मांग पर हाई कोर्ट ने सुनवाई 23 मार्च तक टाली। याचिका में 36 मौतों पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठा ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 09:30:02 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 09:30:02 PM (IST)
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में सीबीआई जांच की मांग। (फाइल फोटो)HighLights
- हाई कोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई 23 मार्च तक टाली।
- याचिकाकर्ता आयोग में व्यस्त होने से कोर्ट में पेश नहीं हुए।
- 36 मौतों के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने सुनवाई 23 मार्च तक टाल दी है। याचिकाकर्ता के आयोग में व्यस्त होने के कारण यह फैसला लिया गया।
बुधवार को इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन याचिकाकर्ता पुनीत शर्मा उस दिन न्यायिक जांच आयोग के समक्ष उपस्थित थे। इसी कारण वे कोर्ट में पेश नहीं हो सके। उनके वकील एडवोकेट अनिल ओझा ने अदालत से सुनवाई आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। अब इस मामले की सुनवाई 23 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
सीबीआई जांच की उठी मांग
- जनहित याचिका में भागीरथपुरा कांड की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दूषित पानी के कारण 36 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
- याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मामले को दबाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई और केवल औपचारिक कार्रवाई कर उन्हें पद से हटा दिया गया।
एफआईआर तक दर्ज नहीं
याचिका में यह गंभीर आरोप भी शामिल है कि इस पूरे प्रकरण में अब तक किसी के खिलाफ आपराधिक मामला तक दर्ज नहीं किया गया। इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बावजूद दोषियों को खुला छोड़ देना न्याय के साथ अन्याय है।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पानी की पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर जारी होने के बावजूद फाइलों को जानबूझकर दबाया गया। इससे यह संदेह पैदा होता है कि पूरा घटनाक्रम किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है। इसी आधार पर मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।
अधिकारियों को पक्षकार बनाने की मांग
याचिका में तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव को मामले से अलग किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य सरकार और निगम प्रशासन को भी इस मामले में पक्षकार बनाने की मांग की गई है।
न्यायिक आयोग कर रहा जांच
हाई कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए पहले ही एक न्यायिक आयोग का गठन किया जा चुका है। याचिकाकर्ता ने आयोग के समक्ष अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की हैं, जिन पर सुनवाई जारी है।