
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 से जूझ रही साढ़े तीन साल की बच्ची अनिका को लगने वाले नौ करोड़ रुपये कीमत के इंजेक्शन की कीमत बढ़कर साढ़े नौ करोड़ हो गई, लेकिन इस संबंध में चल रही याचिका में न शासन का जवाब आया न एम्स का। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से जवाब देने के लिए कहा है।
याचिका की सुनवाई के दौरान सोमवार को वकीलों ने डालर के मुकाबले रुपये की कीमत कम होने की वजह से इंजेक्शन की कीमत बढ़ने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये एकत्रित हो गए हैं। दो करोड़ रुपये की और आवश्यकता है। मामले में अब 30 जून को सुनवाई होगी।
मदद से करीब साढ़े सात करोड़ रुपये एकत्रित कर चुका है
अनिका द्वारकापुरी क्षेत्र में रहती है। उसे अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी टाइप-2 है। इस बीमारी का उपचार दवा जोलगेन्स्मा है, जिसे दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में गिना जाता है। इसकी कीमत लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये है। परिवार अब तक संस्थाओं और समाज की मदद से करीब साढ़े सात करोड़ रुपये एकत्रित कर चुका है।
एडवोकेट लखन शर्मा ने बताया कि बच्ची पिछले कई माह से सिर्फ तरल आहार पर है। उसे जो इंजेक्शन लगना है उसकी शर्त है कि बच्ची का वजन 13 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। बच्ची का वजन नियंत्रित रखना स्वजन के लिए एक चुनौती है।
यह तर्क रखा था वकीलों ने पिछली सुनवाई पर
पिछली सुनवाई पर याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क रखा था कि राज्य शासन सवा करोड़ 'लाड़ली बहनों' को हर माह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। एक माह के लिए प्रति महिला सिर्फ दो रुपये कम कर दिए जाएं तो बच्ची के उपचार के खर्च की व्यवस्था हो सकती है। इसके बाद कोर्ट ने शासन से मामले में जवाब देने के लिए कहा था।
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