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20 करोड़ के घोटाले में ईडी ने पूरी की पूरी कॉलोनी की अटैच, शिक्षा अधिकारी के खिलाफ पूरक अभियोजन पेश

आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी कमल राठौर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर कोर्ट में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। रा...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 08:22:06 AM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 08:22:06 AM (IST)
20 करोड़ के घोटाले में ईडी ने पूरी की पूरी कॉलोनी की अटैच, शिक्षा अधिकारी के खिलाफ पूरक अभियोजन पेश
शिक्षा अधिकारी पर ईडी की कार्रवाई। (एआई इमेज)

HighLights

  1. राठौर ने शिक्षा विभाग के नाम से फर्जी बिल लगाकर सरकारी ट्रेजरी से कुल 20 करोड़ 47 लाख रुपये निकाले थे
  2. इन्हें अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया, सभी खाते शिक्षा अधिकारी व उसके परिवार के नियंत्रण में थे
  3. बाद में घोटाले से निकाले गए इस सरकारी धन को खुद की जेब में डाल लिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी कमल राठौर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर कोर्ट में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। राठौर ने शिक्षा विभाग के नाम से फर्जी बिल लगाकर सरकारी ट्रेजरी से कुल 20 करोड़ 47 लाख रुपये निकाले थे। इन्हें अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया। सभी खाते शिक्षा अधिकारी व उसके परिवार के नियंत्रण में थे। बाद में घोटाले से निकाले गए इस सरकारी धन को खुद की जेब में डाल लिया।

ईडी इस मामले में 29 सितंबर 2025 को भी आरोपितों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है। अब आगे की जांच में मिले नए साक्ष्यों के आधार पर पूरक शिकायत पेश की गई है। 9 जुलाई को प्रस्तुत पूरक अभियोजन शिकायत में राठौर व उसके सहयोगियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 में आरोपित बनाया गया है।


फर्जी बिल पास कराकर 20.47 करोड़ रुपये का सरकारी धन निकाला गया

मामले में आरोपी कमल राठौर सहित अन्य लोगों को कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं। ईडी इंदौर के उप क्षेत्रीय कार्यालय में ईडी ने जांच की शुरुआत कट्ठीवाड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच ब्लॉक शिक्षा कार्यालय ने विभिन्न कामों के बिल ट्रेजरी में भेजे। इन फर्जी बिल पास कराकर 20.47 करोड़ रुपये का सरकारी धन निकाला गया।

जांच के दौरान ईडी को पता चला कि मुख्य आरोपी कमल राठौर ने अन्य आरोपितों के साथ मिलकर फर्जी बिलों के जरिए सरकारी राशि का गबन किया। इस रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जो आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नियंत्रण में थे। बाद में इन खातों से नकद राशि निकालकर उसका उपयोग धार जिले के गंधवानी क्षेत्र में कृषि भूमि खरीदने में किया गया।

आगे की जांच में खुलासा हुआ कि अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कृषि भूमि को बाद में विकसित कर "श्री बालाजी धाम" नाम से एक आवासीय प्लॉटिंग परियोजना तैयार की गई। जांच एजेंसी का मानना है कि इसका उद्देश्य अवैध धन से खरीदी गई संपत्तियों को वैध दिखाना था।

इसी के चलते ईडी ने 23 जून 2026 को इस परियोजना के 56 आवासीय प्लॉट भी अस्थायी रूप से कुर्क कर लिए। इन प्लॉटों का अनुमानित बाजार मूल्य 6 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। ईडी ने पहले भी इस मामले में छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे और बैंक खातों को फ्रीज किया था। इससे पहले भी ईडी आरोपितों की 4.43 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर चुका है।

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