
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एनएचएआई की प्रस्तावित पूर्वी रिंग रोड परियोजना और रेलवे की इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। शाम को कलेक्टर शिवम वर्मा से चर्चा के बाद आंदोलन 20 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
किसान कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्रित
सुबह से बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट के बाहर एकत्रित हुए। किसान अपने साथ गैस चूल्हा, सिलिंडर और कंडे भी लेकर पहुंचे थे। खंडवा रोड और आसपास के गांवों से आए किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमीन अधिग्रहण का विरोध किया।
भारतीय किसान कल्याण संघ के अध्यक्ष संतोष सोमतियां और सचिव संतोष पाटीदार ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। किसानों ने मांग की कि उपजाऊ जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा जाए और प्रस्तावित योजनाओं पर पुनर्विचार किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने तख्तियां लेकर विरोध दर्ज कराया। तख्तियों पर ‘उपजाऊ जमीन बचाओ’ और ‘किसानों की जमीन अधिग्रहण बंद करो’ जैसे नारे लिखे हुए थे।
भीषण गर्मी और उमस के बीच धरने पर बैठे दो किसानों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। प्रदर्शन के दौरान किसान कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तक पहुंच गए, जहां पुलिस बल तैनात रहा।
शाम करीब चार बजे तक प्रदर्शन जारी
शाम करीब चार बजे तक प्रदर्शन जारी रहा। इसके बाद 12 किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर शिवम वर्मा से मिला। चर्चा के दौरान 20 दिन के भीतर परियोजना और किसानों की आपत्तियों पर विस्तृत विचार कर निर्णय लेने पर सहमति बनी। इसके बाद किसानों ने शाम पांच बजे धरना स्थगित कर दिया।
धरना प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के अधिकांश प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। केवल मुख्य प्रवेश द्वार से लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। इससे जरूरी कार्यों से पहुंचे कई आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो हजार किसान प्रभावित हो रहे
किसानों के अनुसार पूर्वी रिंग रोड और इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना से इंदौर और देवास जिले के करीब दो हजार किसान प्रभावित हो रहे हैं। पूर्वी रिंग रोड परियोजना में छह तहसीलों के 44 गांवों की लगभग 820 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिससे करीब 1,200 किसान प्रभावित होंगे। वहीं इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना के लिए 18 गांवों के 923 किसानों की लगभग 500 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी प्रस्तावित है।
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