
लोकेश सोलंकी-नईदुनिया, इंदौर। कर चोरी पर नोटिस भेजने वाला जीएसटी विभाग अब व्यापार मंदा होने पर भी कारोबारी से जवाब मांग रहा है। तमाम बड़े व्यापारियों को केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) विभाग की ओर से नोटिस पहुंच रहे हैं। व्यापारी की किसी अनियमितता और टैक्स चोरी पर नहीं बल्कि उसका धंधा क्यों मंदा है, अधिकारी इस पर सवाल-जवाब कर रहे हैं।
विभाग व्यापारी से यह भी कह रहा है कि उसका व्यापार 20 प्रतिशत की दर से बढ़ना चाहिए। व्यापारी और कर पेशेवर इन मनमाने नोटिसों से हैरान नहीं बल्कि नाराज नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कर संग्रहण करने वाले विभाग के अधिकारी अपना टारगेट पूरा करने के लिए सीधे तौर पर व्यापारियों को धमका रहे हैं।
इंदौर से लेकर सतना तक तमाम बड़े व्यापारियों के पास सीजीएसटी की ओर से ऐसे नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस में लिखा जा रहा है कि जीएसटी प्रभाग के शीर्ष करदाताओं की सूची में आपका नाम आता है। यह देखा गया है कि आपके द्वारा जीएसटी के रूप में जमा किया गया कर भुगतान पिछले वर्ष की तुलना में कम या अस्थिर है।
नोटिस में यह भी लिख दिया गया है कि नियमों के अनुसार व्यापार में प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 20 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है। यह जीएसटी भुगतान में भी परिलक्षित होनी चाहिए। विभाग यहीं नहीं रुक रहा। नोटिस में आगे लिखा जा रहा है कि व्यापारी नोटिस के सात दिनों में लिखित जवाब पेश करें। इसमें यह बताए कि व्यापार क्यों नहीं बढ़ा? साथ में अपने जवाब को पुष्ट करने वाले दस्तावेज भी प्रस्तुत करें।
व्यापारी तो जीएसटी के इन नोटिसों से परेशान और गुस्सा हैं। कर सलाहकारों ने भी ऐसे नोटिसों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इंदौर सीए ब्रांच के पूर्व अध्यक्ष सीए कीर्ति जोशी कहते हैं कि जीएसटी एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है कि हर साल न्यूनतम 20 प्रतिशत व्यापार बढ़े। क्या सरकारी नियम बाजार की दिशा को तय कर सकते हैं?
वैश्विक परिस्थितियां सबसे सामने हैं। ऐसे में व्यापार में उतार-चढ़ाव होना सामान्य है। किसी का व्यापार कम होता है तो इस पर कारोबारी क्या कारण बताएगा और अधिकारी इस पर जवाब कैसे मांग सकते हैं, यह पूरी तरह मनमाना है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट स्वप्निल जैन के अनुसार जीएसटी में व्यापारी खरीद और बिक्री के अलग-अलग रिटर्न भरता है। सारे रिटर्न आनलाइन होते हैं। साथ में जिससे व्यापार हो रहा है, उसके रिटर्न भी जीएसटी के पास होते हैं। यदि कोई लागत रिटर्न और टैक्स जानबूझकर चोरी होती है तो वहां विभाग के पास नियमों में कार्रवाई के अधिकार हैं। ऐसा हो तो कार्रवाई करें। यहां तो विभाग उलटा सबसे ज्यादा कर देने वाले व्यापारियों को ही नोटिस भेज रहा है। स्पष्ट है कि विभाग के अधिकारी दबाव बनाकर अपना राजस्व का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
केंद्रीय जीएसटी में मार्च महीने में अधिकारियों की नई मनमानी भी सामने आई है। बड़े व्यापारियों को उनके रिटर्न में टैक्स क्रेडिट का उपयोग करने से भी रोका जा रहा है। दरअसल व्यापारी उस पर निकलने वाले टैक्स को अपने खाते में मौजूद क्रेडिट से चुका सकता है। लेकिन अधिकारी दबाव बना रहे हैं कि वह क्रेडिट का इस्तेमाल न करे और नकद टैक्स चुकाए। यानी व्यापारी अपनी पूंजी का नुकसान करे ताकि अधिकारी सरकारी टारगेट की पूर्ति कर सकें।