इंदौर आग हादसे में बचे हर्षित पुगलिया अस्पताल से डिस्चार्ज, मां से लिपटकर बोले- 'सब खत्म हो गया'
तिलक नगर थाना क्षेत्र में आगजनी की घटना में मनोज सहित परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई। वहीं मनोज का 25 वर्षीय बेटा हर्षित पुगलिया घायल हो गया था, जिसे ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 19 Mar 2026 10:59:52 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Mar 2026 11:03:08 PM (IST)
इंदौर अग्निकांड में बचे हर्षित पुगलिया अस्पताल से डिस्चार्जनईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। तिलक नगर थाना क्षेत्र में आगजनी की घटना में मनोज सहित परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई। वहीं मनोज का 25 वर्षीय बेटा हर्षित पुगलिया घायल हो गया था, जिसे इलाज के बाद गुरुवार को सीएचएल (CHL) अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। डिस्चार्ज होने के बाद वह तेरापंथ सभागृह पहुंचा, जहां अभी परिवार रह रहा है। यहाँ मां से लिपटकर रोते हुए कहने लगा कि "सब खत्म हो गया है।" वहाँ मौजूद समाजजन उन्हें समझाइश देते रहे। हादसे से हर्षित के मन में ऐसा डर बैठ गया है कि वह उसे भूल ही नहीं पा रहा है। इस पर डॉक्टरों ने उसे मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने की सलाह दी है।
अस्पताल में चला गहन इलाज
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, हादसे में निकली जहरीली गैस के कारण सांस लेने में तकलीफ और गले में जलन की शिकायत के साथ हर्षित को भर्ती करवाया गया था। स्वस्थ होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है। घर पर उन्हें नियमित दवाई और फॉलोअप रखने की सलाह दी है। डॉ. निखिलेश जैन के मुताबिक, उन्हें कम ऑक्सीजन स्तर (84%), बढ़ी हुई धड़कन एवं सामान्य बीपी की स्थिति में भर्ती किया गया था। इनका कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बढ़ा पाया गया था। इमरजेंसी में उनका इलाज इंजेक्शन, दवाएं, नेब्युलाइज़र और ऑक्सीजन थेरेपी से किया गया।
ऑक्सीजन थेरेपी से मिली राहत
डॉक्टर ने बताया कि जब भी आगजनी जैसी घटना होती है, तो मरीज का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। काले तत्व फेफड़े के अंदर चले जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ था। इसके कारण सांस लेने सहित अन्य समस्या होने लगती है। समय पर इलाज मिलने से मरीज स्वस्थ हो जाता है। इसीलिए मनोवैज्ञानिक परामर्श की सलाह दी गई है। जब भी कोई व्यक्ति इस तरह के हादसे को देखता है, तो उसके सामने बार-बार वही चीजें घटित होती हैं। उसे बार-बार वही चीजें याद आती हैं।
मानसिक सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव
हादसों से मानसिक सोच पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में मनोवैज्ञानिक परामर्श की मदद से मरीज को राहत मिलती है। इससे वह हादसे से बाहर निकल पाता है।
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