
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लेबड़ से जावरा तक 124.15 किमी और जावरा से नयागांव तक 127.81 किमी लंबे स्टेट हाईवे-31 (एसएच-31) पर टोल वसूली के मामले में हाई कोर्ट में बुधवार से दोबारा सुनवाई शुरू हुई। हाई कोर्ट ने पूर्व में इस संबंध में प्रस्तुत याचिका निरस्त कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए दोबारा हाई कोर्ट भेज दिया। बुधवार को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की युगलपीठ में सुनवाई हुई।
एडवोकेट विभोर खंडेलवाल ने बताया कि एसएच-31 से जुड़ी इन दोनों सड़कों को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने 2020 में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। कहा था कि लेबड़-जावरा मार्ग का निर्माण और रखरखाव मे. वेस्टर्न एमपी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टोल रोड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
वहीं जावरा-नयागांव मार्ग का कार्य मे. जावरा-नयागांव टोल रोड कंपनी लिमिटेड, एसइआरआई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड, पीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड और सुभाष प्रोजेक्ट एंड मार्केटिंग लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
याचिका में आरोप लगाया था कि लेबड़-जावरा सड़क पर लगभग 605 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 1300 करोड़ रुपये से अधिक टोल वसूला जा चुका है। इसी तरह जावरा-नयागांव सड़क पर 450 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले करीब 1461 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, बावजूद इसके वसूली जारी है।
शासन की ओर से तर्क रखा गया था कि ये परियोजनाएं ‘बिल्ड, आपरेट एंड ट्रांसफर’ (बीओटी) मॉडल पर 25 वर्ष की रियायती अवधि के तहत दी गई हैं। इस अवधि में संबंधित कंपनियों को सड़क के निर्माण, संचालन, रखरखाव और टोल वसूली का अधिकार होता है।
टोल वसूली केवल निर्माण लागत की भरपाई के लिए नहीं, बल्कि सड़क के नियमित रखरखाव, मरम्मत और भविष्य में पुनर्निर्माण के लिए भी की जाती है। शासन के तर्क को मान्य करते हुए 8 अप्रैल 2022 को हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेज दिया। इस पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर दोबारा सुनवाई शुरू करने की गुहार लगाई जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामले में अब 31 मार्च को दोबारा सुनवाई होगी।