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इंदौर ट्रैफिक पर हाई कोर्ट सख्त: पूछा- जब 50 सिग्नल ऑटोमैटिक हैं, तो शेष 36 को अब तक क्यों नहीं किया गया?

शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में दायर पांच जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई हुई।

By Kuldeep BhawsarEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 08:30:30 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 08:31:09 PM (IST)
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इंदौर ट्रैफिक पर हाई कोर्ट सख्त: पूछा- जब 50 सिग्नल ऑटोमैटिक हैं, तो शेष 36 को अब तक क्यों नहीं किया गया?
इंदौर ट्रैफिक पर हाई कोर्ट सख्त

HighLights

  1. कोर्ट ने पूछा, 86 में से 36 सिग्नल अब तक ऑटोमैटिक क्यों नहीं हुए
  2. निगम को अगली सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
  3. एनसीसी कैडेट्स और स्वयंसेवी संगठनों की मदद लेने पर जोर

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में दायर पांच जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम और प्रशासन से सवाल किया कि शहर में 86 ट्रैफिक सिग्नल हैं, जिनमें से 50 ऑटोमैटिक हैं, तो शेष 36 सिग्नलों को अब तक ऑटोमैटिक क्यों नहीं किया गया।

इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा

निगम की ओर से बताया गया कि इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। छह और सिग्नलों को ऑटोमैटिक किया जा चुका है तथा चार नए सिग्नल भी लगाए गए हैं। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए पूछा कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।


कोर्ट द्वारा गठित ट्रैफिक रेग्यूलेटरी कमेटी और बीआरटीएस कमेटी को भी अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन दोनों समितियों ने समय मांगा। अब मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और इंटरविनरों से कहा कि यातायात सुधार से जुड़े उनके सुझाव दोनों समितियों को सौंपे जा सकते हैं।

अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने कहा कि 7 मई 2026 को कोर्ट ने आदेश दिया था कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होने तक ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए स्काउट और एनसीसी कैडेट्स की मदद ली जाए, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अन्य स्वयंसेवी संगठनों की मदद भी ली जा सकती है

इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने कोर्ट को बताया कि कैडेट्स का प्रशिक्षण चल रहा है और पुलिसकर्मियों की भर्ती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कैडेट्स को यातायात व्यवस्था में तैनात किया जा सकता है। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अन्य स्वयंसेवी संगठनों की मदद भी ली जा सकती है।

याचिकाओं में शहर के चौराहों पर पुलिसकर्मियों की कमी, ट्रैफिक सिग्नलों का 24 घंटे संचालित न होना, बीआरटीएस हटाने में देरी, अवैध पार्किंग, सड़क जाम तथा फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

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