
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर इस बार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह पर साफ नजर आ रहा है। 17 फरवरी को होने वाले दीक्षा समारोह के लिए विश्वविद्यालय ने करीब 75 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया था, जिसे मंगलवार को कार्यपरिषद की बैठक में मंजूरी दे दी गई।
आमतौर पर हर साल दीक्षा समारोह पर 25 से 27 लाख रुपये का खर्च आता था, लेकिन इस बार बजट लगभग तीन गुना कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस वर्ष दो सत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को एक साथ सम्मानित किया जाएगा। समारोह में सत्र 2023-24 और 2024-25 के कुल 206 स्वर्ण पदक और 22 रजत पदक विद्यार्थियों को प्रदान किए जाएंगे।
पदकों पर ही लगभग साढ़े 26 लाख रुपये का खर्च आएगा। सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण पदक निर्माण के लिए एजेंसियां आगे आने से बच रही थीं। पहले निकाले गए टेंडर में किसी भी एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई, जिससे विश्वविद्यालय को दूसरी बार टेंडर जारी करना पड़ा। दूसरे टेंडर में कुछ जरूरी बदलाव किए गए, इसके बाद जाकर पदक निर्माण के लिए एजेंसी का चयन हो सका।
समारोह के बजट में टेंट (10 लाख), वेशभूषा (50 हजार), भोजन (4 लाख), परिवहन (45 हजार), मंच व सज्जा (2 लाख), स्टेशनरी (50 हजार), प्रिंटिंग व पोस्ट (2 लाख), आमंत्रण पत्र (45 हजार), रंगरोगन व पुताई (5 लाख) और अन्य खर्चों पर 21 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
तीन गुना बजट बनाने के पीछे विश्वविद्यालय का तर्क है कि इस बार दो सत्र के लिए समारोह रखा है। बढ़ती महंगी की वजह से खर्च अधिक हो रहा है।
झाबुआ में मेडिकल कॉलेज को लेकर विश्वविद्यालय में कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को कार्यपरिषद की बैठक में कालेज की समिति का पंजीयन का प्रस्ताव भी रखा गया। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय फैकेल्टी आफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइसेज झाबुआ समिति का 15 लाख में पंजीयन को मंजूरी मिल गई है।
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इसके अलावा कुलगुरु के वित्तीय अधिकार भी बढ़ाए गए है, जो 8 लाख से बढ़कर 15 लाख कर दिए है। जबकि विश्वविद्यालय के फिजिकल एजुकेशन के विद्यार्थियों के ट्रैक सूट खरीदने के लिए 14 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।