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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। ब्रजेश्वरी (एनएक्स) के दर्दनाक अग्निकांड में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। उद्योगपति मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने ईवी कार में शॉर्ट सर्किट से इनकार कर दिया है। उसका दावा है कि आग घर के आगे लगे बिजली के खंभे से निकली चिंगारी से फैली है। सौरभ ने फायर ब्रिगेड पर भी डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचने और समय पर पानी न पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। दोपहर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव परिवार को सांत्वना देने पहुंचे थे। सौरभ ने सिलसिलेवार घटना बताई और रोने लगा।
बुधवार तड़के 3:30 बजे हुए हादसे में मनोज पुगलिया, बहू सिमरन सहित विजय सेठिया (साला), सुमन सेठिया (साले की पत्नी), रुचिका उर्फ टीनू संचेती (साले की बेटी), राशि संचेती (टीनू की बेटी), तनय संचेती (टीनू का बेटा) और कार्तिक उर्फ छोटू सेठिया (टीनू का चचेरा भाई) की मौत हो गई थी। गुरुवार दोपहर सीएम डॉ. मोहन यादव ने पुगलिया परिवार से जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभागृह (न्यू पलासिया) पर मुलाकात की और मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान मनोज का बड़ा बेटा सौरभ घटना के बारे में बताते हुए रोने लगा। उसने कहा- "डेढ़ घंटे देरी से फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी आई मगर आधा टैंकर पानी था। बाद में टैंकर बुलाया लेकिन वह दूसरी गली में चला गया। पता नहीं उसने कौन सा नशा कर रखा था। उसने फायर ब्रिगेड तक पहुंचने में ही आधा घंटा लगा दिया। फायरकर्मियों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही की। मैंने बोला पानी इस तरफ नहीं उस तरफ डालो, लोग उधर फंसे हैं। मैं उधर से निकल कर आया हूं। इस पर झल्लाते हुए कहा आप ही पानी डाल लो, आपको ज्यादा पता है।"
सौरभ ने आगे बताया- "मैं बाल्टी भर कर पानी डाल रहा था। मैंने कहा मैं अंदर चला जाता हूं, मुझे तो बचा लोगे ना। मेरा एक दोस्त अंदर जाने लगा। उसने कहा मैं अंदर फंसे लोगों को निकाल कर लाऊंगा, नहीं तो उनके साथ चला जाऊंगा। मैं पुलिसवालों से भी रिक्वेस्ट कर रहा था। कुछ देर बाद सीनियर अफसर (थ्री स्टार) आए और उन्होंने मेरी बात सुनी, मेरे साथ-साथ भागने लगे। जबकि फायरकर्मी आगे बढ़ने से डर रहे थे, जबकि उन्होंने फायर सेफ्टी जैकेट पहनी थी। वो जा सकते थे।"
सौरभ के अनुसार - "फायरकर्मी तो जिस इलेक्ट्रिक पोल से चिंगारी निकली उस पर पानी डाल रहे थे। सबसे पहले तो कनेक्शन कट करना था। गैस लाइन भी बंद नहीं की। मैंने कहा गैस सप्लाई बंद करो वरना पूरी कॉलोनी जल जाएगी। फायरकर्मी होज की एक रील ही निकाल पाए। एक साथ चार रील निकालते तो जल्दी काबू पाया जा सकता था।"
सौरभ ने कहा- "एम्बुलेंस भी समय पर नहीं आई। मैंने कहा पता नहीं वो किस स्थिति में बाहर आएंगे, आप एम्बुलेंस तो बुला लो। पुलिसवाले बोले- हमारी गाड़ी से ले जाएंगे। क्या उनकी गाड़ी में आईसीयू रहता है? एम्बुलेंस में कम से कम आईसीयू और ऑक्सीजन की व्यवस्था तो रहती है।" इलेक्ट्रॉनिक लॉक के बारे में उसने स्पष्ट किया- "घर में इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं था। ऐसी अफवाह फैलाई जा रही है। घर में लोहे का और लकड़ी का दरवाजा है। छत पर चैनल गेट पर लॉक लगाते हैं। इसके अलावा कोई लॉक नहीं लगाते हैं।"
सौरभ ने मुख्यमंत्री से कहा- "मैं मुख्यमंत्री को भी वीडियो दिखाने वाला था। लेकिन उन्होंने कहा मैंने जांच के लिए भोपाल की कमेटी बनाई है। मुझे कुछ नहीं चाहिए, हमारे लोग वापस नहीं आ सकते हैं। पैसा तो मैं भी डबल दे दूंगा, दस गुना दे दूंगा। क्या मेरा परिवार वापस दे सकते हैं? मेरी शादी को चार साल हुए थे।" उसने आग की शुरुआत के बारे में बताया- "आग की सबसे पहले मम्मी-पापा को जानकारी लगी थी। दोनों नीचे सो रहे थे। जैसे ही गेट खोला आग की लपटें आईं। मेरी बाइक और कार में आग लगी थी। इलेक्ट्रिक पोल से आग निकल रही थी। कार में तो चार्जर ही कनेक्टेड नहीं था। इलेक्ट्रिक पोल पर ब्लास्ट हो रहा था। इंटरनेट मीडिया पर भी इसका वीडियो है। इस घटना की ईवी जिम्मेदार नहीं है।"
सौरभ के अनुसार आग में घिरे सभी लोगों ने बचने की कोशिश की थी। सब इधर-उधर भागे थे। उसकी पत्नी सिमरन और पापा मनोज का शव टावर पर चैनल गेट के पास मिला था। वह बैठी हुई थी। सिमरन को चार माह का गर्भ था। घर में खुशी का माहौल था। सौरभ और सिमरन की चार साल पूर्व शादी हुई थी। किन्हीं कारणों से सिमरन का एक गर्भपात हुआ था।
डॉक्टर अंकित ने एक महीने पूर्व ही उद्योगपति मनोज पुगलिया के घुटने का ऑपरेशन किया था। हादसे के बाद डॉक्टर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि मनोज जिंदादिल इंसान थे। सुबह करीब 5 बजे उनके बेटे ने कॉल कर घटना की जानकारी दी और कहा कि पापा को अस्पताल ले गए हैं। मैं अस्पताल पहुँचा तो देखा टेबल पर जली और अकड़ी चार बॉडी पड़ी हैं। मैं उन्हें पहचान ही नहीं पाया और पूछा कि इसमें मनोज कौन है। मनोज की मौत से गहरा सदमा लगा।
सर्जरी के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा था कि "डॉक्टर साहब, इम्प्लांट 25 साल तो चलेगा ना?" वह जीना चाहते थे और सबका ख्याल रखते थे। दो महीने पूर्व बेटे सौमिल की शादी की थी, उस वक्त भी उन्होंने मुझसे परिवार की मुलाकात करवाई थी।
गुरुवार को मनोज, सिमरन, रुचिका (टीनू), राशि और कार्तिक, विजय व सुमन की अस्थियां नर्मदा में विसर्जित की गईं। मनोज के छोटे बेटे सौमिल और सिमरन का भाई सौम्य अन्य रिश्तेदारों के साथ ओंकारेश्वर गए हैं। गुरुवार को ही बिहार और सिलीगुड़ी से रिश्तेदार इंदौर आए थे।