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इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन ठगों पर लिया बड़ा एक्शन, 80 मोबाइल नंबर और 15 IMEI कराए ब्लॉक

इंदौर क्राइम ब्रांच साइबर सेल ने NCRP पोर्टल पर मिली शिकायतों और तकनीकी डेटा के विश्लेषण से 80 संदिग्ध मोबाइल नंबर और 15 IMEI नंबर ब्लॉक करवाए।

By Mukesh MangalEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 08:24:40 AM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 08:30:34 AM (IST)
इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑनलाइन ठगों पर लिया बड़ा एक्शन, 80 मोबाइल नंबर और 15 IMEI कराए ब्लॉक
इंदौर क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने संदिग्ध नंबरों की जानकारी का विश्लेषण कर उन्हें ब्लाक कराने की कार्रवाई की। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. ठगी में बार-बार सामने आए नंबरों को चिह्नित किया गया
  2. नंबरों और डिवाइस की पहचान कर दोनों स्तर पर ब्लॉक करवाए
  3. ठग एक नंबर बंद कर उसी मोबाइल से दूसरा नंबर चलाते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। ऑनलाइन ठगी करने वाले बदमाशों के मोबाइल नेटवर्क पर क्राइम ब्रांच ने बड़ा प्रहार किया है। साइबर सेल ने एनसीआरपी पोर्टल पर मिली शिकायतों और तकनीकी डेटा के विश्लेषण के आधार पर 80 संदिग्ध मोबाइल नंबर और 15 आईएमईआई नंबर ब्लॉक करवाए हैं।

ये नंबर और मोबाइल उपकरण अलग-अलग साइबर अपराधों में संदिग्ध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे थे। नंबर और डिवाइस ब्लॉक होने से अब साइबर ठग इनके जरिए दोबारा लोगों को निशाना नहीं बना सकेंगे।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच आई4सी, गृह मंत्रालय के एनसीआरपी पर दर्ज साइबर अपराधों से जुड़े डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इस दौरान ऐसे मोबाइल नंबरों को चिह्नित किया गया, जो अलग-अलग शिकायतों में बार-बार सामने आए थे।


एक ही नंबर से कई ठगी की शिकायतें

तकनीकी जांच में सामने आया कि कुछ मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों से ऑनलाइन ठगी करने में किया जा रहा था। इन नंबरों से ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश और ट्रेडिंग, नौकरी एवं वर्क फ्राम होम के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया फ्राड और फर्जी लिंक भेजने जैसी गतिविधियां की जा रही थीं।

साइबर सेल ने संदिग्ध नंबरों की जानकारी का विश्लेषण कर उन्हें ब्लाक कराने की कार्रवाई की। इसी तरह ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल उपकरणों की पहचान कर उनके 15 आईएमईआई नंबर भी ब्लॉक करवाए गए।

नंबर बदलकर फिर ठगी करने की कोशिश पर रोक

साइबर अपराधियों द्वारा अक्सर एक नंबर बंद करने के बाद दूसरा नंबर इस्तेमाल कर ठगी का नेटवर्क चलाया जाता है। ऐसे में केवल नंबर की पहचान के बजाय मोबाइल डिवाइस के आईएमईआई की पहचान भी महत्वपूर्ण होती है। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में दोनों स्तर पर प्रहार किया गया है।

जोन-2 के डीसीपी अमनसिंह राठौड़ ने गुरुवार को 63 पीड़ितों को उनके गुम मोबाइल लौटाए। रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व गुम मोबाइल मिलने पर चेहरों पर मुस्कान लौट आई। ज्यादातर लोग मोबाइल मिलने की उम्मीद छोड़ चुके थे।

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