
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में आधुनिक इलाज देने का दावा तो किया जाता है, लेकिन इसके चक्कर में जो इलाज पहले मिल रहा होता है, उसे भी बंद कर दिया जाता है। जिला अस्पताल का निर्माण कार्य सात वर्ष से चल रहा है, लेकिन अभी तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। जबकि शहर में एक वर्ष के अंदर ही बड़े और आधुनिक निजी अस्पताल बनकर तैयार हो जाते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारी सरकार और प्रशासन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने को लेकर कितना चिंतित है।
स्वास्थ्य विभाग का एक भी अस्पताल इंदौर में व्यवस्थित संचालित नहीं होता है। निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर भी स्वास्थ्य अधिकारी कभी सख्ती दिखाते हुए नजर नहीं आए हैं। इसका खामियाजा गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ता है। अस्पताल नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल का भवन कब बनकर तैयार होगा, यह अभी भी किसी को पता नहीं है। क्योंकि यहां आए दिन इसके निर्माण की योजना बदलती है और कंपनियों के टेंडर भी बदल जाते हैं। सात वर्षों से जिला अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। अस्पताल को 100 बेड का बनाने की योजना थी, लेकिन अभी तक यह बन नहीं पाया है। इसके बाद अधिकारियों ने इसे वर्ष 2025 तक 300 बेड का बनाने का दावा किया था, लेकिन नहीं हो सका।
बावजूद प्रशासन इसे लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। अस्पताल निर्माण के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों के कई बार दौरे हो चुके हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। हर दौरे में जिम्मेदार जल्द निर्माण करने की बात करते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने स्वयं 2025 तक निर्माण कार्य पूरा होने का दावा कर चुके थे, लेकिन अब इसका निरीक्षण करने भी नहीं आ रहे हैं। फिलहाल अस्पताल के नाम पर यहां सिर्फ स्त्री एवं प्रसूति विभाग को शुरू किया गया है।
जिला अस्पताल के काम की गति धीमी होने का सबसे ज्यादा खामियाजा पश्चिम क्षेत्र की जनता ही हो रहा है। उन्हें छोटे मोटे उपचार के लिए भी निजी अस्पतालों का मुंह ताकना पड़ता है। जिला अस्पताल पर नूरानी नगर, चंदन नगर, सिरपुर, बांक, द्वारकापुरी सहित दर्जनों बस्तियों के रहवासी आश्रित हैं। आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के लोग भी यहां इलाज के लिए आते हैं।
गौरतलब है कि सात वर्षों में इंदौर में दर्जनों निजी अस्पताल बनकर तैयार हुए हैं और साथ ही शुरू भी हो गए हैं। इन अस्पतालों को संचालित करने की अनुमति भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही दी गई है, लेकिन लापरवाही अधिकारी अपना ही अस्पताल शुरू नहीं करवा पा रहे हैं। इस संबंध में कई बार मरीज शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता है।