
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर नगर निगम अब राजस्व वसूली को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने राजस्व विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि जिन जोन क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं होगी, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों पर सेवा से बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि काम में लापरवाही बरतने वालों का न केवल वेतन कटेगा, बल्कि उन्हें अपना पद भी गंवाना पड़ सकता है।
समीक्षा बैठक के दौरान जोन 9, 12 और 20 में राजस्व वसूली की स्थिति अत्यंत निराशाजनक पाई गई। निगमायुक्त ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित सहायक राजस्व अधिकारी (ARO) प्रशांत पटेल, प्रतीक भिडोरिया और सचिन रावत को कड़ी फटकार लगाई। इन तीनों अधिकारियों को लक्ष्य के मुकाबले कम वसूली होने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगमायुक्त ने सभी सहायक राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे आवासीय स्थलों की पहचान और मार्किंग करें जहां किरायेदार रह रहे हैं। इसके साथ ही उन आवासीय परिसरों की सूची भी तैयार की जाएगी जहां नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यह समस्त जानकारी निर्धारित प्रारूप में मुख्यालय पर दर्ज कराना अनिवार्य होगा। निगमायुक्त ने चेतावनी दी कि भौतिक निरीक्षण के दौरान यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर मिला, तो संबंधित अधिकारी पर सीधी कार्रवाई होगी।
राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से निगमायुक्त ने बड़े संस्थानों जैसे मॉल, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और शोरूम के सही असेसमेंट पर जोर दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन बड़े संस्थानों का पूर्ण भौतिक निरीक्षण कर सही डिमांड निकाली जाए और प्रभावी तरीके से वसूली सुनिश्चित की जाए। सभी संपत्तियों का असेसमेंट निर्धारित प्रारूप में ही करने के निर्देश दिए गए हैं।
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निगम प्रशासन ने अधिकारियों को सुधार के लिए केवल दस दिन का समय दिया है। निगमायुक्त ने घोषणा की कि दस दिन बाद दोबारा समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। यदि इस अवधि के दौरान राजस्व वसूली में ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में अपर आयुक्त शृंगार श्रीवास्तव और उपायुक्त केशव सागर सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।