इंदौर रेप केस के बाद बड़ा एक्शन... रैपिडो पर परिवहन विभाग का शिकंजा, 12 बाइक जब्त, एप बंद करने की तैयारी
एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि गुरुवार को उनकी टीम ने रैपिडो की 12 बाइक को जब्त किया। आरटीओ कार्यालय द्वारा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध) को भेजे ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 05 Feb 2026 09:25:10 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Feb 2026 09:25:10 PM (IST)
रैपिडो पर परिवहन विभाग का शिकंजा, एप बंद करने की तैयारीHighLights
- रेप कांड के बाद आरटीओ सख्त, 12 रैपिडो बाइक की गई जब्त
- बिना ट्रेड लाइसेंस चल रही थी टैक्सी, एप बंद करने की तैयारी
- ग्राहक बनकर आरटीओ ने फंसाया, रैपिडो को थमाया कानूनी नोटिस
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से रैपिडो बाइक टैक्सी चालक द्वारा दुष्कर्म की घटना के बाद परिवहन विभाग ने गुरुवार को बिना ट्रेड लाइसेंस लेकर चल रहे रैपिडो बाइक टैक्सी पर कार्रवाई की। आरटीओ की टीम ने मोबाइल एप के माध्यम से रैपिडो राइड बुक की। राइडर जब बुकिंग करने वाले ग्राहक को लेने पहुंचे, तो परिवहन विभाग के दस्ते ने बिना वैध ट्रेड लाइसेंस के संचालन का हवाला देते हुए बाइक जब्त की। तीन दिन पहले ही रैपिडो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया जा चुका है। अब पुलिस की मदद से एप को बंद करवाने की कार्रवाई की जाएगी।
अवैध संचालन को लेकर पुलिस को लिखा पत्र
एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि गुरुवार को उनकी टीम ने रैपिडो की 12 बाइक को जब्त किया। आरटीओ कार्यालय द्वारा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अपराध) को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इंदौर में रैपिडो बाइक टैक्सी कंपनी को कोई ट्रेड लाइसेंस जारी या नवीनीकृत नहीं किया गया है। इसके बावजूद रैपिडो मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से खुलेआम बाइक टैक्सी सेवाएं चला रही है। इसी कारण इसे बंद करवाने का अनुरोध किया गया है।
कंपनी को नोटिस और एप बंद करने के निर्देश
एआरटीओ ने बताया कि रैपिडो बाइक टैक्सी चालक घटना सामने आते ही रैपिडो ट्रांसपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कर तत्काल ऑनलाइन मोबाइल एप्लीकेशन बंद करने और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट किया गया है कि यदि जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो एकतरफा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई की मांग
वर्ष 2021 से 2024 तक कई बार संबंधित कंपनियों की मोबाइल एप्लीकेशन बंद कराने और कानूनी कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन एप पर प्रत्यक्ष नियंत्रण न होने के कारण इन्हें बंद नहीं कराया जा सका। अब पुलिस के सहयोग से कार्रवाई तेज की जा रही है।