
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नईदुनिया के अभियान ये फुटपाथ हमारा है के दूसरे दिन नईदुनिया की टीम पहुंची शहर के हृदय स्थल राजवाड़ा। भीड़भाड़ भरे बाजारों में सड़कों पर फुटपाथ तो बने हैं, लेकिन चलने के लिए नहीं बल्कि पुतले खड़े करने के लिए। टीम राजवाड़ा से कृष्णपुरा की ओर से जाने वाली सड़क पर पहुंची। लगभग पांच-पांच फीट चौड़े फुटपाथ सड़क के दोनों ओर बने हुए हैं, बावजूद इसके पैदल यात्री सड़क पर चलने को मजबूर हैं।
सड़क पर पीछे की ओर से अंधगति से आते वाहनों से हादसों का अंदेशा हमेशा बना रहता है। नगर निगम मुख्यालय से चंद कदम की दूरी स्थित इस क्षेत्र में फुटपाथ पर हो रहे अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई तो होती है, लेकिन सिर्फ दिखावटी। निगम की रिमूवल टीम यदा-कदा यहां पहुंची है, बावजूद इसके हालात में कोई सुधार नहीं है। चौराहे पर ही पुलिस चौकी भी बनी हुई है। दिनभर यातायात पुलिसकर्मी भी तैनात रहते हैं, बावजूद इसके न नगर निगम फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश करता है न यातायात पुलिस।
यातायात के जबरदस्त दबाव के बीच राजवाड़ा से कृष्णपुरा पुल की ओर जाने वाली सड़क पर पैदल यात्री जान जोखिम में रखकर चलने को मजबूर हैं। वजह है कि सड़क के दोनों बनाए फुटपाथ पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। ये दुकानदार फुटपाथ पर पुतले खड़े कर देते हैं। कुछ दुकानदार तो दुकान का सामान तक फुटपाथ पर जमा देते हैं। हालत यह हो जाती है कि सड़क पर फुटपाथ कहां है यह पता लगाना तक मुश्किल है। समस्या यह है कि राजवाड़ा की ओर से एमजी रोड पर यातायात का जबरदस्त दबाव आता है। दिन भर वाहनों की रैलमपैल लग रहती है, बावजूद इसके कोई यातायात पुलिसकर्मी व्यवस्था बनाने के लिए खड़ा नहीं रहता।
यातायात विभाग और नगर निगम की टीम संयुक्त रूप से सतत कार्रवाई करती हैं। कार्रवाई के दौरान फुटपाथ पर रखा सामान भी जब्त किया जाता है। बावजूद इसके कार्रवाई के अगले ही दिन दुकानदार दोबारा कब्जा कर लेते हैं। हम लगातार सख्ती कर रहे हैं। -हिंदूसिंह मुवैल, एसीपी ट्रैफिक
इंदौर में जनता को नहीं मिल रहा है मौलिक अधिकार वाला ‘फुटपाथ‘