
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के बदहाल यातायात और बीआरटीएस को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिकाओं में गुरुवार को सुनवाई हुई। यातायात में सुधार को लेकर हाई कोर्ट द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ अभिभाषक विनय झेलावत ने कोर्ट को बताया कि समिति सदस्य जांच के लिए शहर में निकले थे। इस दौरान 20 से ज्यादा ऐसे चौराहे मिले जहां एक भी पुलिस वाला नहीं था।
सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की कमी का मुद्दा भी उठा। अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने कोर्ट को बताया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या स्थाई समाधान होने तक अंतरिम व्यवस्था करते हुए स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) से मदद ली जा सकती है। कोर्ट अब इस मामले में 14 मई को सुनवाई करेगी।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान बीआरटीएस मामले में गठित समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सामने रखी। वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागडिय़ा ने कोर्ट को बताया कि शहर में 87 ट्रैफिक सिग्नल हैं। इनमें से 37 सिग्नल अब भी आटोमैटिक नहीं हो सके हैं। शहर में अब भी पुलिसकर्मियों के 221 पद खाली हैं।
शासकीय अधिवक्ता ने इस पर बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रक्रिया चल रही है। कुछ जवान ट्रैनिंग में हैं। उनके आने के बाद व्यवस्था सुधरेगी। कोर्ट के यह पूछने पर कि स्काउट और अन्य संस्थाओं से स्वयंसेवक ट्रैफिक संभालने के लिए ला सकते हैं क्या, डीसीपी ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में स्वयंसेवक तैनात किए गए थे।
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि सडक़ किनारे और फुटपाथ पर अवैध पार्किंग और कब्जों की वजह से जाम की स्थिति बनती है। इस पर कोर्ट ने पुलिस अधिकारी और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से इस बारे में सतत कार्रवाई के लिए कहा।
इंजीनियर अतुल शेठ ने सुझाव दिया और कहा कि कब्जा करने और अवैध पार्किंग वालों पर बहुत कम जुर्माना लगता है। इसे बढ़ाया जाए। निगम में ट्रैफिक इंजीनियर का पद है, लेकिन कोई नियुक्ति नहीं हुई। जवाहर मार्ग एकांकी है लेकिन दोनों ओर से वाहन आते हैं। उन्होंने बीआरटीएस के होलकर कालेज के सामने मौजूद स्टॉप को भी हटाने की मांग भी की। कोर्ट ने कहा कि सभी सुझाव कोर्ट द्वारा गठित समिति के सामने रख दें।
इंदौर में एक ही दिन में वाहन चलाते मोबाइल पर बात करने वाले 72 चालकों के लाइसेंस निरस्त