
उदय प्रताप सिंह, इंदौर। शहर का सबसे बड़ा एमवाय अस्पताल मरीजों को उपचार के साथ संक्रमण भी दे रहा है। अस्पताल के वार्ड में मरीज जहां बेड पर उपचार ले रहे हैं, साथ ही वहां की जिस दीवार पर मल्टी पैरा मानीटर, आक्सीजन लाइन जैसे मेडिकल उपकरण लगे होते हैं, उन दीवारों पर अस्पताल के शौचालयों का पानी सीलन के रूप में बह रहा है और वहां फंगस भी नजर आ रहा है। इस कारण मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है।
गौरतलब है कि सरकारी क्लीनिक और अस्पतालों में स्वच्छता न होने से संक्रमण एक मरीज से दूसरे में तक फैलता है। यदि किसी बीमारी से ग्रसित मरीज के शरीर में मौजूद जीवाणु में दवा से प्रतिरोध है तो उससे अस्पताल में दूषित वातावरण उस मरीज में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट को बढ़ाता है। अनहाइजीन परिस्थिति से उस मरीज से अन्य मरीज या स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण के साथ एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट होने का खतरा रहता है। गौरतलब है कि अस्पतालों में स्वच्छता न होने के कारण कई बार सुपरबग जैसी स्थिति भी पैदा होती है।
एमवायएच के मेडिसिन व सर्जरी वार्ड में दीवारों पर दिख रही सीलन
एमवाय अस्पताल में दूसरे व तीसरे फ्लोर पर मेडिसिन व सर्जरी वार्ड में जहां मरीज उपचार के लिए भर्ती हैं, वहां की दवाओं पर टायलेट के पानी के लीकेज के कारण दीवारों पर सीलन नजर आ रही है। न्यूरो सर्जरी वार्ड नंबर तीन में तो हालात यह हैं कि सीलन के कारण दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ रहा है। दीवारों पर फफूंद भी नजर आ रही है। इसी तरह हड्डी रोग वार्ड में भी दीवारों पर सीलन बनी हुई है। डिजिटल एक्स-रे कक्ष में भी यही स्थिति है।
मरीज के संक्रमित कपड़े व सलाइन के पास रखा पार्टिशन पर्दा
एमवायएच के अधिकांश वार्ड में मेडिकल वेस्ट के लिए लाल, हरा, नीले रंग के वेस्टबिन नहीं रखे हैं। कचरे के लिए बाल्टियों में सिर्फ काली पालिबैग लगाकर रखी गई है। सिरिंज, संक्रमित कचरा व सामान्य कचरा किस वेस्टबिन में डाला जाएगा, यह वार्ड में स्पष्ट नहीं है। इतना ही नहीं, हड्डी रोग विभाग के एक वार्ड में कार्डबोर्ड के बक्से में जहां मरीज के संक्रमित कपड़े रखे जाते हैं, उसमें ही सलाइन की उपयोग हो चुकी आइवी बोतल डाली जा रही है। उसी के समीप पार्टिशन पर्दे भी रखे हुए हैं। ऐसे में इन पर्दों को जब मरीज को इंजेक्शन लगाने या ड्रेसिंग के दौरान उपयोग किया जाता है तो उससे संक्रमण होने का खतरा रहता है।
अस्पताल परिसर में ये कमियां भी नजर आईं
वार्ड में मरीजों के लिए रखे गए गद्दे फट रहे हैं।
मरीजों के लोहे के बेड गंदे हैं। लंबे समय से उन पर रंगरोगन नहीं हुआ।
बेड के नीचे दवाई के लिए लगे बाक्स की सफाई नहीं होती। मरीज इसमें कचरा डालते हैं और इसमें गंदगी रहती है। मरीज का इसके ऊपर बेड पर उपचार होता है।
अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में अनुपयोगी गद्दे फेंके हुए हैं।
कई स्थानों पर फैला है भवन निर्माण का मलबा।
डाक्टर की पार्किंग के पास खुले में पड़े रहते हैं संक्रमित ग्लव्स।
नहीं मिली चादर
तेजू लाल, मरीज के स्वजन का कहना है कि पिता हरि सिंह भर्ती हैं। गुरुवार को हमने एक खाली बेड पर रखी चादर खुद ही उठाकर ली थी। शुक्रवार चादर बदली नहीं गई। वार्ड में सफाई तो बेहतर है, लेकिन दीवानों पर सीलन बनी हुई है। कंबल व तकिए भी नहीं मिले।
साहिल, मरीज के स्वजन का कहना है कि अस्पताल में हमारे मरीज को न चादर मिली, न तकिया। हम तो अपने घर से चादर व कंबल लेकर आए।
जिम्मेदार बोले
पीडब्ल्यूडी नहीं दे रहा ध्यान
डॉ. अशोक यादव, अधीक्षक एमवाय अस्पताल का कहना है कि अस्पताल में 40 से ज्यादा टायलेट से लीकेज की समस्याएं हैं। इसके कारण ही दीवारों पर सीलन नजर आ रही है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों को एक साल पहले हमने इनके सुधार के लिए कहा है, अभी तक सुधार पूरा नहीं हुआ। उन्हें बार-बार रिमाइंडर भी दे रहे हैं। वार्ड के पुराने पलंग का रंगरोगन करवाएंगे।
विशेषज्ञ बोले
संक्रमण की आशंका अधिक
डॉ. संजय दीक्षित, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज का कहना है कि एंटीबायोटिक के उचित डोज न लेने के कारण मरीज में दवा के प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसित है। अस्पताल में हाईजीन व स्वच्छता न होने पर मरीज को अस्पताल जनित संक्रमण होने के चांस ज्यादा होते हैं। जिस मरीज में पहले से ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस है, उसमें यह प्रतिरोध क्षमता अन्य संक्रमण के कारण बढ़ने की आशंका रहती है। इससे मरीज के उपचार के दौरान सुधार में ज्यादा समय लगता है।
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