एक पिन से जोड़ दी पक्षी के पंख की मांझ लगने से टूटी हड्डी, जबलपुर के वेटरनरी छात्र ने किया कमाल
नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के पीजी छात्र डॉ. अनिकेत त्यागी ने शोध के दौरान मांझे से घायल एक तोते के क्षतिग्रस्त हुए पंख की हड्डी ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 28 Feb 2026 10:31:46 AM (IST)Updated Date: Sat, 28 Feb 2026 10:42:46 AM (IST)
तोते की सर्जरी से पहले का पंख की तस्वीर, इसके बाद पंख की हड्डी जुड़ने के बाद की तस्वीर।HighLights
- वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर में सर्जरी की कांफ्रेंस में पीजी छात्र ने प्रस्तुत किया शोध
- पक्षियों के टूटे या कटे पंखों को दोबारा बनाना पशुचिकित्सा में चुनौतीपूर्ण माना जाता था
- नई तकनीक के जरिए घायल पक्षियों को दोबारा उड़ान भरने का अवसर मिलेगा
अतुल शुक्ला, नईदुनिया, जबलपुर। नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग में किए गए शोध में पक्षियों के कटे और क्षतिग्रस्त पंखों को जोड़ने की प्रभावी तकनीक विकसित की गई है। अब तक पक्षियों के टूटे या कटे पंखों को दोबारा बनाना पशुचिकित्सा विज्ञान में चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। पक्षियों की नाजुक हड्डियां और हल्की शारीरिक संरचना सर्जरी को जोखिमपूर्ण बनाती है।
अब इसी चुनौती को आसान बनाने का कार्य सर्जरी विभाग के पीजी छात्र डॉ. अनिकेत त्यागी ने किया है। शोध के दौरान उन्होंने मांझे से घायल एक तोते के क्षतिग्रस्त हुए पंख की हड्डी को सफलतापूर्वक जोड़ा। सर्जरी से पहले तोते को सुरक्षित तरीके से बेहोश किया गया। इसके बाद पंख की टूटी हड्डी को एक छोटी धातु पिन (इंट्रामेडुलरी पिनिंग तकनीक) की सहायता से मुख्य हड्डी के सहारे स्थिर किया गया। पूरी प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और सूक्ष्म तकनीक से की गई।
15 दिन बाद एक्स-रे में पंख की हड्डी जुड़ी मिली
पशुचिकित्सा विज्ञान कॉलेज जबलपुर में चल रहे राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान पीजी के छात्र अनिकेत ने शुक्रवार को अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। बताया कि सर्जरी के बाद तोते को निगरानी में रखकर नियमित उपचार दिया। लगभग 15 दिन बाद दोबारा परीक्षण और एक्स-रे में पाया गया कि पंख की हड्डी सफलतापूर्वक जुड़ चुकी है।
दोबारा उड़ पाना मुश्किल हो जाता है
दरअसल, अक्सर मांझे या खुले तार से पक्षियों के पंख बुरी तरह कट-फट जाते हैं और हड्डी टूटने के बाद उनका दोबारा उड़ पाना मुश्किल हो जाता है। कॉलेज के सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अपरा शाही के अनुसार, इस नई तकनीक से अब गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पंखों को पहले की तुलना में अधिक सफलता के साथ जोड़ा जा सकेगा। इससे घायल पक्षियों को दोबारा उड़ान भरने का अवसर मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।