
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला की धार्मिक संरचना को लेकर हाई कोर्ट में प्रस्तुत जैन समाज की जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य ही नहीं है।
जैन समाज की ओर से पूर्व में भी इसी तरह की याचिका प्रस्तुत हुई थी, जिसे कोर्ट निरस्त कर चुका है। इस याचिका को भी निरस्त किया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि आपको जो भी कहना है वह लिखित में दें। कोर्ट दो अप्रैल को तय करेगी कि इस याचिका में सुनवाई आगे जारी रखी जाए या नहीं।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका दिल्ली निवासी सलेकचंद जैन ने प्रस्तुत की है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि भोजशाला मंदिर, मस्जिद नहीं बल्कि जैन समाज का गुरुकुल है। पुरातत्व विभाग के सर्वे में मिली मूर्तियां जैन तीर्थंकरों की हैं। ब्रिटिश म्यूजियम में जो मूर्ति है, वह जैन धर्म की देवी अंबिका की है, वाग्देवी (सरस्वती) की नहीं।
भोजशाला में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे में भी बहुत सी मूर्तियां निकली हैं, ये मूर्तियां भी जैन धर्म से संबंधित हैं। याचिका में यह भी कहा है कि भोजशाला एक जैन गुरुकुल था। इसमें सभी धर्म के बच्चे पढ़ने आते थे। जैन धर्म की प्राकृत भाषा का संस्कृत में अनुवाद भी भोजशाला में होता था।
यहां आदिनाथ भगवान का मंदिर भी था। यहां से नेमीनाथ भगवान की मूर्ति भी निकली है, जो 22वें तीर्थंकर है। भोजशाला में जैन धर्म से संबंधित कुछ अन्य चिह्न भी निकले हैं।
शुक्रवार को याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट दिनेश राजधर, एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन, शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी उपस्थित हुए।
वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2024 में भी इन्हीं बिंदुओं को लेकर याचिका प्रस्तुत की थी जिसे कोर्ट निरस्त कर चुका है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका को लेकर आपको जो भी आपत्तियां हैं उन्हें लिखित में दे दें। हम दो अप्रैल को होने वाली सुनवाई में तय करेंगे कि इस याचिका की सुनवाई जारी रखना है या नहीं।
इन बिंदुओं पर निरस्त हुई थी पूर्व में प्रस्तुत याचिका
याचिकाकर्ता सलेकचंद जैन ने वर्ष 2024 में भी इन्हीं बिंदुओं को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष याचिका प्रस्तुत की थी। हालांकि जुलाई 2024 में कोर्ट ने इस याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि याचिका निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत नहीं की गई है और याचिकाकर्ता ने यह भी नहीं बताया है कि याचिका इतनी देरी से क्यों प्रस्तुत की गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता जरूर दी थी कि वे चाहें तो याचिका निर्धारित प्रारूप में तैयार कर दोबारा प्रस्तुत कर सकते हैं।
दो अप्रैल को ही अन्य याचिकाओं की सुनवाई भी
भोजशाला मामले में पहले ही से चार याचिकाएं और एक अपील हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है। युगलपीठ इन सभी में एक साथ सुनवाई कर रही है। इन सभी याचिकाओं और अपील में अगली सुनवाई दो अप्रैल को होना है।