
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में तैयार की गई 40x40 इंच की ‘सनातन राखी’ भगवान खजराना गणेश को अर्पित की गई। मातृश्री पालरेचा परिवार द्वारा तैयार यह राखी अलीजा सरकार हनुमान मंदिर सहित पांच मंदिरों में अर्पित की गई। इसके अलावा महाकाल मंदिर उज्जैन, चिंतामन गणेश और छोटा गणपति को भी राखी समर्पित की गई।
शांतु पुंडरीक पालरेचा एवं धीरज पालरेचा ने बताया कि गुरुवार को राखी देखने के लिए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मालिनी गौड़, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता सहित प्रमुख बाजारों के पदाधिकारी और शहरवासी पहुंचे। राखी के केंद्र में राष्ट्रीय चेतना और सनातन संस्कृति के प्रतीकों को स्थान दिया गया है। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष को ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रभाव की थीम पर तैयार किया गया है।
भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। भद्रा रहित श्रावण पूर्णिमा पर दिनभर राखी बांधी जा सकेगी। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9.08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9.48 बजे तक रहेगी।
इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा के कारण इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ज्योतिर्विद श्यामप्रसाद तिवारी के अनुसार पंचांग में रक्षाबंधन के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में उदयातिथि के मान से दिनभर राखी बांधी जा सकेंगी।
राहुकाल : सुबह 11.06 से दोपहर 12.40 बजे तक।
चंद्रग्रहण : सुबह 6.55 से दोपहर 12.30 बजे तक।
पुजारी केशव गुरु के अनुसार रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण भी रहेगा, यह भारत में कहीं नजर नहीं आएगा। ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक उसकी स्थानीय दृश्यता से जुड़ा होता है। इसलिए इंदौर में ग्रहण की दृश्यता न होने के आधार पर इसका धार्मिक महत्व नहीं होगा। इस वर्ष शुक्रवार और पूर्णिमा का संयोग पारिवारिक संबंधों में मिठास घोलेगा।
ज्योतिषीय गणना में शुक्रवार का संबंध सुख, सौहार्द, प्रेम और पारिवारिक समृद्धि से जोड़ा जाता है, वहीं पूर्णिमा को चंद्रमा की पूर्णता का दिन माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा, शुक्रवार और रक्षाबंधन का एक साथ आना पारिवारिक संबंधों में स्नेह, संवाद और आत्मीयता को महत्व देने वाला संयोग है।
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