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उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एक्ट में स्थानीय निकायों को किया अनदेखा, विस्तारित बिंदुओं के साथ हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए याचिका में बदलाव की अर्जी को मंजूरी दे दी। याचिकाकर्ता को तीन दिनो में ...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 11 Jul 2026 09:03:54 AM (IST)Updated Date: Sat, 11 Jul 2026 09:03:54 AM (IST)
उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एक्ट में स्थानीय निकायों को किया अनदेखा, विस्तारित बिंदुओं के साथ हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
इंदौर हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने दी नए बिंदुओं को याचिका में शामिल करने की अनुमति, अगले सप्ताह होगी सुनवाई
  2. युगलपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए याचिका में बदलाव की अर्जी को मंजूरी दे दी
  3. याचिकाकर्ता को तीन दिनो में याचिका में आवश्यक बदलाव करना होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राज्य सरकार द्वारा उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को लेकर जारी की गई अधिसूचना के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने याचिका में कुछ बिंदुओं पर बदलाव की अनुमति मांगी।

जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए याचिका में बदलाव की अर्जी को मंजूरी दे दी। याचिकाकर्ता को तीन दिनो में याचिका में आवश्यक बदलाव करना होगा। नए बिंदुओं के साथ याचिका पर हाई कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगी। बदलाव के साथ याचिका का विस्तार तो हो ही रहा है पूरे एक्ट को भी कोर्ट में चुनौती दी जा रही है।

अब इसमें बदलाव करने की कोर्ट से अनुमति मांगी गई थी

अभिभाषक अक्षत पहाडिय़ा ने उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। पहले सिर्फ मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के नाम में इंदौर को उज्जैन के बाद रखे जाने पर भी सवाल उठाए गए थे। याचिका जब दायर की गई थी, उस समय मेट्रोपालिटन अथारिटी को चुनौती दी गई थी। अब इसमें बदलाव करने की कोर्ट से अनुमति मांगी गई थी।


याचिकाकर्ता इस पूरी परियोजना, एक्ट की धारा-3 जिसमें मेट्रोपालिटन का क्षेत्र तय किया गया है उसे भी चुनौती दे रहे हैं।इस पूरे एक्ट को ही चुनौती देने के बिंदु शामिल किए जा रहे हैं। कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट के सामने बदलाव करने के लिए तथ्यों को रखा गया। जिस पर कोर्ट ने सहमति देते हुए इस आवेदन को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने अगले तीन दिनों में बदलाव करने के लिए निर्देश देते हुए आने वाले सप्ताह में इसे दोबारा सुनवाई के लिए पेश करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

स्थानीय निकायों को किया अनदेखा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तथ्य रखे कि सरकार की मेट्रोपोलिटन क्षेत्र की अधिसूचना संविधान के 74 वे संशोधन की मंशा के खिलाफ है। स्थानीय निकायों की अनदेखी करते हुए मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को निर्णय लिया गया। मेट्रोपालिटन क्षेत्र में जिन स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है उससे चर्चा भी नहीं की गई न ही उनके सुझाव लिए गए।

मेट्रोपालिटन क्षेत्र में उज्जैन और इंदौर को शामिल किया गया है। दोनों शहरों की अलग-अलग प्रकृति पर भी विचार नहीं किया।कानूनन मेट्रोपालिटन क्षेत्र के लिए कमेटी बनेगी। इस कमेटी के सदस्यों में दो तिहाई संख्या उन क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों की होना थी। जबकि इस अधिसूचना में ऐसा नहीं किया गया है। सारी शक्तियां अथारिटी को दे दी कमेटी को शक्तिहीन रखा गया।

इंदौर का हिस्सा पूरा, उज्जैन का 60 प्रतिशत से कम

अधिसूचना के तहत मेट्रोपॉलिटन में इंदौर और उज्जैन का 16 हजार वर्ग किमी का क्षेत्र निर्धारित किया है। इसमें आधा दर्जन जिले शामिल हैं। इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, शाजापुर और रतलाम की 38 तहसीलें शामिल हैं। 2781 गांव जुड़े हैं। 75 लाख से अधिक की जनसंख्या का अनुमान लगाते हुए मेट्रोपॉलिटन की तैयारी की जा रही है। अंतिम रूप से 16000.87 वर्ग किमी का क्षेत्र लिया गया है।

75.34 लाख आबादी का अनुमान लगाया गया है। इसमें इंदौर का शत प्रतिशत क्षेत्र जो कि 3901.63 वर्ग किमी है उसे शामिल किया गया है। इसी तरह उज्जैन के 6097.99 वर्ग किमी क्षेत्र में से 3595.24 वर्ग किमी क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है। यह लगभग 59 प्रतिशत होता है। शामिल क्षेत्र के अनुपात में भी अंतर है। उसके बावजूद इसका मुख्यालय उज्जैन बनाया जा रहा है।

एमपी के 6 जिलों के 2781 गांव का होगा विकास, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपालिटन रीजन का हुआ गजट नोटिफिकेशन