
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नाते-रिश्तेदार, दोस्त हों या दूर के परिचित, हर एक के चहेते मेजर हमजा शरीफ रविवार को तिरंगे में लिपटकर सैफी नगर में आए तो हर एक ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। तिरंगे में लिपटे आए मेजर की अंतिम यात्रा ने हर एक को भावुक कर दिया। अपने इकलौते बेटे को खोने के दर्द से माता-पिता उबर नहीं पा रहे हैं, तो पत्नी की नम आंखें इस घटना के दर्द को बयां कर रही थीं। स्कूल-कॉलेज के दोस्तों का कहना था कि कभी सोचा नहीं था फ्रेंडशिप डे पर इस तरह से मिलेंगे।
चाचा ने कहा कि यकीन नहीं हो रहा कि हमारा हंसता-खेलता बच्चा हमसे दूर हो गया। जैसलमेर (राजस्थान) में दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। एक ओर बेटे, पति और परिवार के सदस्य को खोने का दर्द था, तो दूसरी ओर देश के सपूत को खोने का गम हर एक की आंख में साफ दिखाई दे रहा था। हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
पार्थिव शरीर सैफी नगर मस्जिद परिसर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। दाऊदी बोहरा समाज के लोगों की मौजूदगी में सैयदना साहब के प्रतिनिधि शब्बीर भाई साहब हुसामी ने जनाजे की नमाज और मगफिरत के लिए दुआ की। इसके बाद सेना के वाहन में तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर इमली बाजार स्थित दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा। यहां सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। पुष्पचक्र अर्पित कर मेजर हमजा आरिफ को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके पिता फखरुद्दीन आरिफ, पत्नी ज्योति अरोड़ा, परिजन, शहर काजी इशरत अली, जौहर मानपुरवाला, मजहर हुसैन सेठजीवाला, बुरहानुद्दीन शकरुवाला आदि मौजूद थे।
मेजर की अंतिम यात्रा में सेना के वाहन के पीछे सैकड़ों लोगों का काफिला वाहनों से चल रहा था। इसमें मेजर हमजा आरिफ अमर रहें और भारत माता की जय के नारे लगाए जा रहे थे। राजवाड़ा पर बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक एकता के प्रति सम्मान का भाव देखते ही बन रहा था।
मेजर के अंतिम संस्कार में कई सैन्य परंपराएं निभाई गईं। इसमें पार्थिव देह को सम्मान के साथ तिरंगे से लपेटा गया था। सुपुर्दे खाक से पहले यह तिरंगा उनकी पत्नी ज्योति अरोड़ा को विधिवत मोड़कर प्रदान किया गया। इससे पहले गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, साथी अधिकारियों एवं अन्य गणमान्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही सम्मान के प्रतीक स्वरूप बिगुल बजाया गया।
मेजर के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले हार्दिक देवकर के चेहरे पर अपने दोस्त को खोने का गम साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि उनका बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट हुआ था, लेकिन उन्होंने देश सेवा को चुना। उन्हें दोस्त, टीचर सब पसंद करते थे। बुरहानपुर में रहने वाले चाचा मुस्तफा हमदर्द कहते हैं कि इस घटना से सब दुखी हैं। भाई का हाल बुरा है। सबकी पूछ-परख करने वाला हमजा हमें छोड़कर चला गया।
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