सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बुलडोजर चलाने वाले को माना कुशल कर्मचारी, अब मिलेंगे 60 लाख रुपये
सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर चालक को कुशल कर्मचारी माना है। दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके स्वजन ने जिला न्यायालय में मुआवजे के लिए प्रकरण प ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Mar 2026 09:05:37 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Mar 2026 09:05:37 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को दिया झटका। (फाइल फोटो)HighLights
- SC ने बुलडोजर चालक 'कुशल कर्मचारी'
- सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को दिया झटका
- चक्रवर्ती ब्याज के साथ मुआवजे का आदेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर चालक को कुशल कर्मचारी माना है। दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके स्वजन ने जिला न्यायालय में मुआवजे के लिए प्रकरण प्रस्तुत किया था। जिला कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया था कि वह मृतक के आश्रितों को 52 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दे। इस फैसले को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में अपील प्रस्तुत की।
60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि बुलडोजर चालक की आय प्रमाणित नहीं हुई है क्षतिपूर्ति की राशि को 52 लाख से घटाकर 9.5 लाख रुपये कर दी। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने यह मानते हुए कि बुलडोजर चालक एक कुशल कर्मचारी होता है बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह क्षतिपूर्ति के रूप में 52 लाख रुपये नहीं बल्कि 60 लाख रुपये भुगतान करें।
हाई कोर्ट ने घटा दी थी मुआवजे की राशि
एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत शंभू नामक बुलडोजर चालक की दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उसकी पत्नी, आठ वर्षीय बेटी और माता-पिता ने क्षतिपूर्ति के लिए प्रकरण प्रस्तुत किया। जिला कोर्ट ने 52 लाख रुपये क्षतिपूर्ति निर्धारित की। इसका विरोध करते हुए बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में अपील की। इसमें कहा कि शंभू की आय प्रमाणित नहीं की गई। क्षतिपूर्ति की राशि की गणना गलत है। अपील स्वीकारते हुए हाई कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 9.5 लाख रुपये कर दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी मालिक के साक्ष्य को माना आधार
इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील प्रस्तुत हुई। कोर्ट ने माना कि चूंकि कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक ने स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर साक्ष्य दी और माना कि शंभू की मासिक आय 24 हजार रुपये थी। इसे एक कुशल कर्मचारी की आय माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को अपास्त करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह क्षतिपूर्ति के रूप में 60 लाख रुपये की राशि चक्रवृद्धि ब्याज के साथ शंभू के आश्रितों को भुगतान करें।