'भोजशाला मंदिर या मस्जिद नहीं, हमारा गुरुकुल था...' जैन समाज की याचिका पर MP हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
धार भोजशाला की धार्मिक संरचना को लेकर हाई कोर्ट में नया पेंच आ गया है। भोजशाला को लेकर जैन समाज की ओर से नई जनहित याचिका प्रस्तुत हुई है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 19 Mar 2026 05:58:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Mar 2026 05:58:00 PM (IST)
भोजशाला मामला जैन समाज ने फिर दायर की याचिकाHighLights
- जैन समाज ने बताया इसे अपना प्राचीन गुरुकुल
- हाई कोर्ट में PIL, दावा- सर्वे में मिली मूर्तियां जैन धर्म की
- सरस्वती नहीं, देवी अंबिका की है मुख्य प्रतिमा!
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला की धार्मिक संरचना को लेकर हाई कोर्ट में नया पेंच आ गया है। भोजशाला को लेकर जैन समाज की ओर से नई जनहित याचिका प्रस्तुत हुई है। इसमें दावा किया गया है कि भोजशाला मंदिर, मस्जिद नहीं बल्कि जैन समाज का गुरुकुल है। पुरातत्व विभाग के सर्वे में मिली मूर्तियां जैन तीर्थंकरों की हैं।
'मूर्ति देवी अंबिका की, वाग्देवी (सरस्वती) की नहीं'
ब्रिटिश म्यूजियम में जो मूर्ति है, वह जैन धर्म की देवी अंबिका की है, वाग्देवी (सरस्वती) की नहीं। भोजशाला में एएसआइ के वैज्ञानिक सर्वे में भी बहुत-सी मूर्तियां निकली हैं, ये मूर्तियां भी जैन धर्म से संबंधित हैं। जनहित याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट की युगलपीठ सुनवाई करेगी। जैन समाज इसके पहले भी इसी तरह की जनहित याचिका प्रस्तुत कर चुका है, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
'दोबारा याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र'
याचिकाकर्ता सलेकचंद जैन की ओर से प्रस्तुत इस जनहित याचिका में कहा है कि हाई कोर्ट ने पूर्व में याचिका निरस्त करते हुए जैन समाज से कहा था कि वह चाहे तो भविष्य में दोबारा याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के बाद अब भोजशाला मामले में दोबारा सुनवाई शुरू हुई है, इसलिए उन्होंने दोबारा याचिका दायर की है।
याचिका में क्या कहा
शुक्रवार 20 मार्च को न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार गुप्ता की युगलपीठ के समक्ष इस मामले में सुनवाई होना है। याचिका में कहा है कि भोजशाला एक जैन गुरुकुल था। इसमें सभी धर्म के बच्चे पढ़ने आते थे। जैन धर्म की प्राकृत भाषा का संस्कृत में अनुवाद भी भोजशाला में होता था। यहां आदिनाथ भगवान का मंदिर भी था। यहां से नेमीनाथ भगवान की मूर्ति भी निकली है, जो 22वें तीर्थंकर है। भोजशाला में जैन धर्म से संबंधित कुछ चिह्न भी निकले है।