
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में प्रदेश में बढ़ते तापमान के कारण हीट स्ट्रोक के प्रकरणों और उनसे संबंधित मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसी के चलते इंदौर के जिला अस्पताल, सिविल अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लू एवं तापघात से बचाव के लिए, प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए विशेष कक्ष बनाए गए हैं।
जिसमें आवश्यक दवाइयों के साथ-साथ ओआरएस के पैकेट, कूलर एवं पंखों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इंदौर में 12 हीट स्ट्रोक क्लिनिक बनाए गए हैं। इसके अलावा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपस्वास्थ्य केंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रीष्म ऋतु में तापमान बढ़ने और गर्म हवा लगने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वृद्ध, बच्चे, खिलाड़ी और धूप में काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक खतरे में रहते हैं। पसीना न आना, गर्म-लाल एवं शुष्क त्वचा, मतली, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, उल्टियां होना, बेहोश हो जाना एवं पुतलियां छोटी हो जाना अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होने व तापघात के प्रमुख लक्षण एवं संकेत हैं।
सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी के मुताबिक बाहर निकलना आवश्यक हो तो छतरी व धूप के चश्मे का उपयोग करें। धूप में निकलने से पहले कम से कम दो गिलास पानी अवश्य पिएं। बुखार व तापघात होने पर निकट के अस्पताल में संपर्क कर आवश्यक दवा का उपयोग सुनिश्चित करें। ओआरएस का घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, फलों का रस आदि का सेवन लाभदायक होता है।
गर्मी व तापघात से बचाव के लिए 'बीट द हीट' रणनीति का पालन करें-