
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड के बाद चुस्त दिख रहा सरकारी तंत्र अब दवा कंपनियों के निरीक्षण व जांच में जुट गया है। 15 फरवरी तक प्रदेश की 62 दवा कंपनियों की जांच का आदेश जारी किया गया है। इसमें इंदौर, देवास, उज्जैन के साथ ग्वालियर क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने यह आदेश जारी किया है।
शुक्रवार को टीमें इंदौर-पीथमपुर की कंपनियों में जांच करती रही। इस बीच इंदौर व आसपास की कई फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर कमियां पाने की जानकारी सामने आई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने तीन-तीन ड्रग इंस्पेक्टरों की टीमें बनाकर हर फैक्ट्री में जांच के लिए दो से तीन दिन का समय निर्धारित किया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार अब तक इंदौर के सांवेर रोड स्थित शैजा फार्मूलेशन, पालदा कि एबिल फार्मूलेशन, सांवेर रोड की निकेम ड्रग, पंचशील आर्गेनिक में जांच हो चुकी है। शुक्रवार को भी टीमें पीथमपुर की ऋषभ फॉर्मास्यूटीकल्स में जांच कर रही थी। केंद्र सरकार ने सभी दवा कंपनियों को दवा निर्माण के नए मानकों (रिवाइज्ड शेड्यूल एम) के अनुसार फैक्ट्रियों को अपडेट करने, संसाधन जुटाने व तय मानकों के अनुसार निर्माण प्रक्रिया संचालित करने का आदेश दिया है।
सभी दवा कंपनियों से कहा गया था कि वे औषधि नियंत्रक व नियामक के वेब पोर्टल पर दवा फैक्ट्रियों में शेड्यूल एम के अनुसार किए गए अपग्रेडशन की जानकारी अपलोड करें। जिन दवा कंपनियों ने जानकारी अपलोड नहीं की उनसे निर्माण की अनुमति छिनी जा सकती है।
इसके बाद अब केंद्र के आदेश पर प्रदेश के खाद्य औषधी प्रशासन ने निरीक्षण शुरू कर दिया है। निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट बनाकर भोपाल और दिल्ली भेजी जाएगी। जिन फैक्ट्रियों में मानकों का पालन होना नहीं पाया गया और ज्यादा कमियां मिली उन्हें पूरी तरह बंद करवाने के आदेश जारी हो सकते हैं।
प्रारंभिक निरीक्षण और जांच के आधार पर यह माना जा रहा है कि इंदौर व आसपास की कई दवा फैक्ट्रियों में भारी पैमाने पर कमियां और गड़बड़ियां मिली है। सांवेर रोड की निकेम लैब, शैजा फार्मूलेशन, पालदा क्षेत्र की एबिल के नाम इसमें शामिल है। इनमें से एक-दो फैक्ट्रियों को तो पहले ही विभाग उत्पादन रोकने का आदेश दे चुका है।निरीक्षण रिपोर्ट भोपाल जाने के बाद फैक्ट्रियों को नोटिस जारी कर ज्यादा कमियां मिलने पर दवा उत्पादन हमेशा के लिए रोकने का आदेश जारी हो सकता है।
सांवेर रोड की निकेम लैब में 150 से ज्यादा बिंदुओं पर कमियां मिलने की बात सामने आई है। हालांकि निकेम दवा कंपनी के संचालक राजेश गंगवानी का कहना है कि उन्हें अब तक ड्रग विभाग ने कमियों की सूची नहीं बताई है। भोपाल रिपोर्ट जाने के बाद हमें जानकारी मिलेगी। उससे पहले हमने शेड्युल एम में अपग्रेड करने के लिए आवेदन भी किया है। दूसरी ओर कुछ कंपनियों को थोड़े बहुत सुधार के बाद दवा निर्माण जारी रखने की अनुमति दी जाने के संकेत है।
दवा फैक्ट्रियों में मानकों के पालन पर केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर ने सख्त रूख अपनाया है। राज्यों को निर्देश थे कि केंद्र व राज्य के औषधि प्रशासन के अधिकारी संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे। हालांकि मप्र में राज्य के अधिकारियों ने केंद्रीय अधिकारियों के बिना निरीक्षण शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि केंद्र के सख्त रूख को देखते हुए प्रदेश के दवा उद्योगों को थोड़ी राहत देने के लिए राज्य के अधिकारियों ने यह दांव चला है। ताकि जिन फैक्ट्रियों में कम कमियां हो उन्हें बचाया जा सके। साथ ही रिपोर्ट तैयार करने और नोटिस देने से लेकर कार्रवाई की प्रक्रिया में भी अच्छा खासा समय दिया जा सके।