
नईदुनिया प्रतिनिधि,इंदौर। शहर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में शनिवार को लंच के बाद 150 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई है। डाॅक्टरों ने जांच में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन की समस्या बताई है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने सोमवार सुबह स्कूल कैंपस में जमकर हंगामा किया। बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने पर माता-पिता स्कूल में पहुंचे और उन्होंने हंगामा किया।
खाद्य विभाग की टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए किचन सील करने की कार्रवाई की। जांच के दौरान किचन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। किचन में एक्सपायरी डेट का आचार मसाला, सेव सहित सामग्री मिली है, इनका उपयोग बच्चों के लिए बनाए जा रहे खाने में किया जा रहा था।
जानकारी अनुसार शनिवार से चौथी कक्षा तक के बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद रविवार को योग दिवस पर खाने के बाद तबीयत बिगड़ी, इसी प्रकार सोमवार को भी कई बच्चे बीमार हुए। हालाका मामले में करीब 35 ई-मेल ही अब तक प्रबंधन के पास पहुंचे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों के स्वजन को फोन लगाकर जानकारी ली। जिसमें यह पाया गया कि सभी ने आइसक्रीम का सेवन किया था। स्वजन ने आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों के लिए जो आइसक्रीम आई थी, उसे फ्रीजर में ठीक से नहीं रखा गया। उसे बाहर रखा जिसके कारण पिघल गई थी। इससे उसमें बैक्टरिया बना और बच्चे बीमार होने लगे। यह स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही है।
स्वजन ने आरोप लगाया कि शनिवार को प्राइमरी विंग की मेस में खाना खाने के बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी। सोमवार सुबह जब अभिभावक शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे, तो प्रबंधन की ओर से जिम्मेदार अधिकारी बात करने तक नहीं आया। इससे नाराज होकर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक का घेराव किया और स्कूल की अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
प्राचार्य और स्टाफ ने भी वहीं खाना खाया
बच्चों का बीमार होना हमारे लिए भी चिंता का विषय है, लेकिन इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि यह स्कूल के खाने से हुआ। शनिवार को मेस में राजमा, चावल, चवले की सब्जी और अमूल आइसक्रीम परोसी गई थी, यह जून में मैन्युफेक्चर है। यही खाना प्राचार्य और पूरे स्टाफ ने भी खाया था। पेट में इंफेक्शन की शिकायतें खाने के 48 घंटे बाद आनी शुरू हुई हैं। हमारे पास 100-150 बच्चों के बीमार होने की जानकारी आई है, लेकिन प्रबंधन के पास 35 पालकों के शिकायत के ई-मेल प्राप्त हुए हैं। हमें अभी तक यह पता नहीं चला है कि बच्चों को यह समस्या क्यों हुई है।
- ऋचा तिवारी, हेडमिस्ट्रेस