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इंदौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बदहाल, किसी रूट पर सुविधा नहीं, तो कही समय की गड़बड़ी; अब सिर्फ ई-बसों से उम्मीद

सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त और सुगम नहीं होने से बड़ी संख्या में लोग निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों का उपयोग करने को मजबूर हैं। इसका असर शहर की सड़क...और पढ़ें

By prem jatEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 06:55:03 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 06:55:03 PM (IST)
इंदौर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बदहाल, किसी रूट पर सुविधा नहीं, तो कही समय की गड़बड़ी; अब सिर्फ ई-बसों से उम्मीद
इंदौर में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था लाचार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. इंदौर में ट्रैफिक जाम और पार्किंग संकट
  2. इंदौर की सड़कों पर बढ़ा गाड़ियों का बोझ
  3. सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था लाचार

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान रखने वाले इंदौर में लोक परिवहन व्यवस्था अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त और सुगम नहीं होने से बड़ी संख्या में लोग निजी दोपहिया और चारपहिया वाहनों का उपयोग करने को मजबूर हैं। इसका असर शहर की सड़कों पर साफ दिखाई देता है।

प्रमुख मार्गों पर दिनभर ट्रैफिक का दबाव बना रहता है, जबकि पार्किंग की कमी के कारण फुटपाथ तक वाहनों से घिरे नजर आते हैं। लोक परिवहन व्यवस्था बेपटरी है, किसी रूट पर सुविधा नहीं है, तो कहीं समय पर बसें नहीं पहुंच रहीं।


इंदौर में लोक परिवहन बेपटरी

प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत आधुनिक वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनाई है। इंदौर में इन बसों का संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन इंदौर में फिलहाल केवल तीन रूटों पर 36 ई-बसें ही दौड़ रही हैं, जबकि 24 बसें अब भी डिपो में खड़ी हैं।

आगामी चरण में इंदौर को 90 नई ई-बसें मिलने वाली हैं। पीथमपुर स्थित बस निर्माता कंपनी के यार्ड में 200 इलेक्ट्रिक बसें तैयार हैं, जिनमें से अधिकांश जल्द विभिन्न शहरों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद शहर में लोक परिवहन की सुविधा में बढ़ोतरी होगी।

250 सिटी बसें संचालित

वर्तमान में शहर में करीब 250 सिटी बसें संचालित हो रही हैं, लेकिन कई रूटों पर यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद बस सुविधा मिलती है। सिटी बसों का टाइमिंग सही नहीं है। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में लोग इनका उपयोग पूरी तरह से नहीं कर पा रहे।

वहीं करीब 40 आईबस की सुविधा भी एबी रोड पर देवास नाका से राजीव गांधी चौराहा तक उपलब्ध है। इसकी उपलब्धता तो सही है, लेकिन बीआरटीएस के हटने के बाद यात्रियों में कमी आई है। क्योंकि सामूहिक लेन में बस चलने के कारण बसों में देरी हो रही है।

कॉलोनियों तक मिल रही ई-रिक्शा की सुविधा

शहर में 12,226 पैसेंजर ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। शुरुआत में इनको कॉलोनियों से मुख्य सड़कों तक चलाने के लिए पंजीयन किया गया है, लेकिन यह मुख्य सड़कों पर ही चलने लगे। इसके कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बनने लगी और कॉलोनियों में यात्रियों को सुविधा नहीं मिली।

इस वर्ष ई-रिक्शा को चार जोन बनाकर विभाजित किया गया है, लेकिन संचालन में अब भी अव्यवस्था बनी हुई है। वहीं जिले में 46,777 ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं, जिनमें अधिकांश बिना मीटर के चलते हैं। मनमाने किराए की शिकायतें भी लगातार सामने आती रहती हैं, इसलिए लोग इनका उपयोग भी नियमित नहीं करते हैं।

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लोक परिवहन की सुविधा

  • पीएम ई-सेवा इलेक्ट्रिक: तीन रूट पर 36 बसें चल रही हैं, 24 बसें डिपो में खड़ी हैं। वहीं 90 बसें इंदौर आना हैं।
  • सिटी बस व आईबस: 250 सिटी बसें शहर में चल रही हैं। कई रूटों पर लोग बसों के इंतजार में रहते हैं।
  • ई-रिक्शा: शहर में 12,226 पैसेंजर ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, वर्तमान में चार जोन में विभाजित किया गया है।
  • ऑटो रिक्शा: इंदौर में 46,777 ऑटो पंजीकृत हैं, लेकिन शहर में बगैर मीटर के ऑटो रिक्शा संचालित होते हैं।