
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। एजुकेशन हब के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में ढाई हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी कोचिंग हैं। इनमें हजारों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ते हैं। भंवरकुआ, विजय नगर, नवलखा, पलासिया, गीता भवन जैसे सघन क्षेत्रों में दिनभर विद्यार्थियों की रैलमपेल रहती है।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि ये कोचिंग क्लासेस जिन भवनों में संचालित हो रही हैं उनमें से ज्यादातर में आग लगने की स्थिति में सुरक्षा के कोई इंतजाम ही नहीं हैं। हर बार हादसे के बाद नगर निगम इन कोचिंग क्लासेस की जांच का अभियान चलाता है, लेकिन इक्का-दुक्का जगह कार्रवाई के बाद अभियान बंद हो जाता है।
निगम कोचिंग क्लासेस के खिलाफ जांच को लेकर कितना गंभीर है यह इसी से समझा जा सकता है कि पिछले दो माह में सिर्फ सात कोचिंग क्लासेस के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच में पता चला था कि इन कोचिंग क्लासेस में आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम ही नहीं हैं।
नगर निगम ने पिछले दो माह में 102 भवन सील किए हैं। इन भवनों में आग लगने पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। इन 102 भवनों में सात कोचिंग क्लासेस हैं। जांच में यह बात सामने आई थी कि इन कोचिंग क्लासेस में अग्नि सुरक्षा के उपकरण ही चालू नहीं हैं। निगम ने इन कोचिंग क्लासेस को सील किया था, लेकिन बाद में फिर खोल दिया।
शहरभर में ढ़ाई हजार से ज्यादा कोचिंग क्लासेस संचालित होती है। पिछले चार-पांच साल में फायर सेफ्टी को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने संचालकों की बैठक ली है। दिशा-निर्देश मिलने के बाद एसोसिएशन से जुड़े संस्थानों ने फायर सेफ्टी को लेकर व्यवस्था की है। जिला प्रशासन की तरफ से समय-समय पर टीम का निरीक्षण भी किया जाता है। -रवि दांगी, अध्यक्ष, इंदौर कोचिंग क्लासेस ऑनर्स एसोसिएशन
हम सिर्फ कोचिंग क्लासेस ही नहीं अन्य भवनों की भी नियमित जांच करते रहते हैं। जांच में जो गड़बड़ी मिलती है उसे सुधारने के लिए कहा जाता है। तब तक भवन को सील किया जाता है। पिछले दो माह में 102 भवन सील किए हैं। -विनोद मिश्रा, फायर अधिकारी इंदौर