
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। अक्सर सड़कों पर हादसे होते हैं, लोग देखते हैं, रुकते नहीं। कोई जल्दी में होता है, कोई डरता है, तो कोई जिम्मेदारी से बच निकलता है। ऐसे में घायल तड़पता रह जाता है और समय पर इलाज न मिलने से जिंदगी हार जाता है। इसी भीड़ में कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए इंसानियत सबसे पहले होती है।
इंदौर में ऐसे ही दो राहवीर सामने आए हैं, जिनका खून का रिश्ता तो घायलों से नहीं था, फिर भी इंसानियत का रिश्ता निभाया। इन लोगों ने सब कुछ छोड़कर सड़क पर पड़े घायलों की मदद की, उन्हें अस्पताल पहुंचाया और घायलों को मौत के मुंह से खींच लाए। इस संवेदनशीलता के लिए इनका चयन सरकार की राहवीर योजना के लिए किया है।
सरकार ने सड़क हादसों में घायलों को समय पर उपचार मिल सके इसके लिए राहवीर योजना शुरू की है। दुर्घटना के बाद गोल्डन अवर्स में घायल को अस्पताल या ट्रामा सेंटर पहुंचाने वाले व्यक्ति को राहवीर की उपाधि दी जाती है और 25 हजार रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाता है।
पूरे प्रदेश में बीते साल 21 अप्रैल से यह योजना लागू की गई है। इसी योजना के तहत इनका चयन किया गया है। एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समिति की अनुशंसा के बाद पात्र राहवीरों का विवरण ई-डीएआर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसके बाद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होती है।
इंदौर के 16 ब्लैक स्पाट पर 119 हादसों में 121 लोगों की जान चली गई। अधिकांश इसलिए क्योंकि समय पर उपचार नहीं मिल पाया। आंकड़े बताते हैं कि हर साल सिर्फ एमवाय अस्पताल में ही हेड इंजुरी के करीब तीन हजार ऑपरेशन होते हैं। ऐसे हालात में ये राहवीर उम्मीद की किरण बनकर सामने आए है और अन्जान जिंदगियां बचाई है।
कुशवाह नगर क्षेत्र निवासी नितेश बीते साल 19 जून को सड़क हादसे में घायल हो गए थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें लगी थीं। रात्रि में वहां से गुजर रहे निलेश गौर ने बिना किसी देरी किए उन्हें अरबिंदो अस्पताल पहुंचाया।
इतना ही नहीं निलेश पूरी रात अस्पताल में रुके और सुबह स्वजन के आने के बाद घर के लिए रवाना हुए। निलेश का कहना है कि उनका भी आठ साल पहले एक्सीडेंट हो गया था, तब लोगों ने उनकी मदद की थी, इसलिए उपचार की महत्ता समझते है।
बीते साल 20 जून को देवास नाका क्षेत्र में संजय कुरोची सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हो गए थे। न्याय नगर निवासी सूरज विश्वकर्मा ने घायल को लेकर तुरंत अरबिंदो अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से संजय की जान बच सकी। इससे उनको नया जीवन मिला।