
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई है। करीब 15 साल बाद होने जा रही जनगणना पहले से ज्यादा आधुनिक और डिजिटल होगी। इस वर्ष मकान की गणना होगी और अगले साल आबादी की गणना की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी और प्रगणक घर-घर जाकर ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी एकत्रित करेंगे।
इसमें पहली बार आमजन भी घर बैठे ही ऑनलाइन स्वयं की गणना कर सकेंगे। जनगणना को लेकर गठित जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में हुई। इसमें तय हुआ कि गणना ब्लॉक बनाने के लिए मकानों की नंबरिंग का कार्य शुरू किया जाएगा। यह कार्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक साथ होगा।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद मध्यप्रदेश में भी शासन-प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। 31 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी 52 जिलों की सीमाएं फ्रीज कर दी गई हैं, जिसके चलते जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक नए जिले, तहसील या उपखंड नहीं बनाए जा सकेंगे। इंदौर में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय जनगणना समिति गठित करने के साथ ही चार मास्टर ट्रेनरों की नियुक्ति भी हो चुकी है।
गणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा। इसमें एक से 30 मई तक मकानों की गणना की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में 1 से 28 फरवरी तक आबादी की गणना की जाएगी। इसकी संदर्भ तारीख एक मार्च 2027 रहेगी। प्रदेशभर में लगभग डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया जाएगा, जो मोबाइल एप के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे।
स्वयं गणना के लिए एप लांच किया जाएगा। जिसका उपयोग कर आमजन सवालों के जवाब भरकर स्वयं की गणना कर सकेंगे। इसके लिए 15 दिन का समय मिलेगा। गणना के लिए प्रगणक के आने पर आमजन को स्वयं गणना की जानकारी देना होगी। प्रगणक द्वारा संबंधित आइडी पोर्टल पर अपलोड करते ही आमजन की स्वयं गणना की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। जरूरत होने पर प्रगणक इसमें सुधार कर सकेंगे।
जनगणना के पहले चरण में होने वाली मकानों की गणना के दौरान सभी छोटे-बडे निर्माण की गिनती होगी। इसमें निर्माणाधीन इमारत जिसकी छत डल चुकी होगी उसकी गणना भी की जाएगी। कंक्रीट या तीन फीट ऊंचे सभी निर्माण की गणना की जाएगी। वहीं किसी निर्माण पर यदि त्रिपाल डली है, तो उसकी गणना भी होगी। मकान गणना में 37 तरह के सवाल पुछे जाएंगे।
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें इंदौर जिले में करीब साढ़े 6 लाख मकान दर्ज किए गए थे और आबादी 32 लाख 76 हजार 697 रही थी। उस समय औसत साक्षरता दर 80.87 प्रतिशत दर्ज की गई थी। अब अनुमान है कि जिले की जनसंख्या 50 लाख के पार पहुंच सकती है और मकानों की संख्या 10 लाख या उससे अधिक हो सकती है। बीते पांच वर्षों में शहर का विस्तार सुपर कारिडोर, बायपास, इंदौर-उज्जैन रोड और खंडवा रोड सहित चारों दिशाओं में तेजी से हुआ है।