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इंदौर में बना अनोखा रिकॉर्ड, पथरीली पहाड़ी पर एक ही दिन में रोपे 51 हजार पौधे, 21 लाख लगाने का है लक्ष्य

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तीसरे दौर की शुरुआत रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पौधा रोप कर शुरुआत की। इस पहाड़ी पर एक ही दिन में 51 हजार पौधे...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 08:45:40 PM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 08:45:40 PM (IST)
इंदौर में बना अनोखा रिकॉर्ड, पथरीली पहाड़ी पर एक ही दिन में रोपे 51 हजार पौधे, 21 लाख लगाने का है लक्ष्य
पथरीली पहाड़ी को हरा बनाएगा इंदौर।

HighLights

  1. सूखते ट्यूबवेल और अल-नीनो के खतरे से निपटने को इंदौर मुस्तैद
  2. यशवंत सागर से पाइपलाइन बिछाकर होगी पेड़-पौधों की सिंचाई
  3. आर्थिक राजधानी के बाद अब पर्यावरण की दिशा तय करेगा इंदौर

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हातोद रोड पर बीएसएफ परिसर में स्थित बुढानिया पथरीली पहाड़ी अब हरियाली का नया ठिकाना बनेगी। एक पेड़ मां के नाम अभियान के तीसरे दौर की शुरुआत रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पौधा रोप कर शुरुआत की। इस पहाड़ी पर एक ही दिन में 51 हजार पौधे रोपे गए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बीते वर्षों की तरह इस बार भी अभियान की कमान संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री ही मंत्री प्रह्लाद पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा के क्षेत्रीय संगठन भी इस पहाड़ी पर पौधा लगाने पहुंचे।

इंदौर अब पर्यावरण की दिशा भी तय कर रहा

पौधा रोपण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मप्र को नदियों का मायका बताया और वृक्षों को ऋषि की संज्ञा दी। हरियाली के लिए इंदौर के इस सामूहिक और लगातार प्रयास की तारीख करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले कि प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करने वाला इंदौर अब पर्यावरण की दिशा भी तय कर रहा है। अभियान में पौधारोपण के लिए बीएसएफ के जवान, अधिकारियों के साथ निगम के कर्मचारी, भाजपा के कार्यकर्ता, समाजिक संगठन और विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में जुटे थे।


21 लाख पौधे लगाने का महा-अभियान और लक्ष्य

एक ही दिन में 1 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य था और कुल 21 लाख पौधे इसी वर्षा ऋतु में लगाने का ऐलान किया गया है। एक लाख पौधे सिर्फ इसी बुढ़ानिया पहाड़ी पर लगेंगे। पहले दिन इसमें से 51 हजार पौधे रोपे गए। अब हर सप्ताह लगातार पौधारोपण का अभियान चलेगा। इस पहाड़ी पर एक लाख पौधे रोपने के बाद अलग-अलग जगहों पर कुल 20 लाख पौधे और लगाए जाएंगे।

पौधारोपण के बाद मंच पर आए विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर एक पेड़ मां के नाम अभियान में इंदौर ने सबसे ज्यादा पेड़ लगाने का रिकार्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इंदौर के 80 प्रतिशत ट्यूबवेल सूख चुके हैं। चैन से रहना है तो पेड़ लगाना होगा और जल संग्रहण करना होगा। इसके लिए हमने 51 हजार वाटर हार्वेस्टिंग की सरंचनाए भी इस साल बनाने की मुहिम शुरू कर दी है।

बीएसएफ के जांबाज जवानों का सम्मान और जल संरक्षण

मुख्यमंत्री पौधा रोपने के बाद संबोधित करने आए और उन्होंने बीएसएफ के दो जवानों रवि चौहान और आरक्षक रामेंद्र सिंह का सम्मान भी किया।नक्सल के विरुद्ध अभियान में खुद बारुदी सुरंग का शिकार बने इन जवानों ने अपनी पूरी बटालियन को बचाया था। मुख्यमंत्री ने दोनों जवानों को दो-दो लाख रुपये सम्मान राशि देने की घोषणा भी की।

उन्होंने अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि 8-10 फीट के पौधे यहां रोपे जा रहे हैं। 2 से 4 वर्ष की उम्र वाले इन पौधों को बढ़ा करना भी आसान होगा। हमारी सरकार बनने के बाद लगातार जल संरक्षण के काम किए हैं और कुल 10 हजार करोड़ के काम हुए। अल नीनो के खतरे से निपटना है तो वृक्ष ही मददगार बनेंगे। वृक्ष हमारे लिए ऋषि की तरह तपस्या करते हैं और प्राणवायु प्रदान करते हैं।

पौधों की उत्तरजीविता और सिंचाई की विशेष व्यवस्था

इस साल इंदौर शहर और उसके आसपास के इलाकों में 21 लाख पौधों रोपे जाएगा। लक्ष्य से आगे बढ़कर हमने 22.5 लाख पौधे और गड्डे तैयार कर लिए हैं। 6 से लेकर 10 फीट तक के पौधे रोपे रहे हैं। यानी रोपे गए सभी पौधे जीवित रहें। असल में पौधारोपण अभियान 5 जुलाई से शुरु हो चुका है और अभी तक ढाई लाख पौधों को रोपण कर चुके हैं।

यह भी पढ़ें- रतलाम, इंदौर सहित 9 स्टेशनों पर पूछताछ सेवा निजी हाथों में, 20 जुलाई से बदलेगी व्यवस्था, 24 घंटे मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

शहर में जगह कम है इसलिए ग्रामीण क्षेत्र, वन विभाग, बीएसएफ की जमीन पर वृक्षारोपण कर रहे हैं। देव गुराड़िया के पीछे टेकरी पर 1 लाख से ज्यादा पौधे, राऊ तालाब के किनारे 10 हजार, सिरपुर तालाब के पीछे 1 लाख पौधे रोपे जाएंगे। जगह कम है इसलिए 21 लाख पौधों को बांटकर अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया जा रहा है।

बुढ़ानिया में पथरीली जमीन पर पोधों को उगाना मुश्किल काम है इसलिए पौधों की सिचाई के लिए यशवंत सागर से पाइप बिछाकर संपवेल में पानी इकट्ठा कर पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति कर दी गई है और एक टीम को तैनात कर सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी।