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सड़क के गड्ढों की शिकायत इंदौर मेयर हेल्पलाइन ऐप 311 पर क्यों नहीं, अफसरों को हाई कोर्ट ने किया तलब

शहर के बिगड़े यातायात पर लगी याचिकाओं पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक साथ सुनवाई हुई। पहले से बिगड़े यातायात को बरसात में सड़क पर बने गड्ढे और ज्यादा ...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 11 Jul 2026 09:28:43 AM (IST)Updated Date: Sat, 11 Jul 2026 09:40:10 AM (IST)
सड़क के गड्ढों की शिकायत इंदौर मेयर हेल्पलाइन ऐप 311 पर क्यों नहीं, अफसरों को हाई कोर्ट ने किया तलब
इंदौर की सड़क पर हो रहे हैं गड्ढे। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शहर के बिगड़ते यातायात पर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई
  2. शहर के बिगड़े यातायात पर लगी याचिकाओं पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक साथ सुनवाई हुई
  3. पहले से बिगड़े यातायात को बरसात में सड़क पर बने गड्ढे और ज्यादा बदहाल कर रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के बिगड़े यातायात पर लगी याचिकाओं पर हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक साथ सुनवाई हुई। पहले से बिगड़े यातायात को बरसात में सड़क पर बने गड्ढे और ज्यादा बदहाल कर रहे हैं। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हर वर्ष बरसात में यही हाल होते हैं।

स्थिति ये है कि गड्ढों की शिकायत करने के लिए भी नागरिकों के पास कोई आसान माध्यम नहीं है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि नगर निगम के मेयर हेल्पलाइन एप (311) पर जिस तरह गंदगी, ड्रेनेज जैसी शिकायत होती है तो उस पर सड़के के गड्ढों की शिकायत क्यों नहीं होती? नगर निगम के वकील ने जवाब देने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। कोर्ट ने निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को मंगलवार को हाजिर होने के लिए कहा है।


जवाब देने के लिए निगम के वकील ने समय मांगा

जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने इसके बाद कोर्ट ने नगर निगम से पूछा है कि नगर निगम की 311 एप्प पर सुविधा है कि यदि कहीं कचरा पड़ा है तो जनता उसका फोटो भेज सकती है जिसके बाद नगर निगम वहां पहुंचकर सफाई करती है। ऐसे ही सडक़ पर मौजूद गड्ढों की शिकायत करने के लिए एप्प पर कोई सुविधा क्यों नहीं है। हालांकि इसका जवाब देने के लिए निगम के वकील ने समय मांगा। जिसके बाद नगर निगम को 2 दिन का समय देते हुए हाईकोर्ट ने सभी अफसरों को तलब कर लिया है।

शहर में लगातार बदहाल हो रहे यातायात, बीआरटीएस को हटाने, रोक के बावजूद शहर में गाडिय़ों पर लगे हूटर, पार्किंग की समस्या आदि को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। याचिकाओं में शहर के चौराहों पर पुलिस जवानों के द्वारा यातायात संभालने का मूल काम नहीं करने, ट्रैफिक सिग्नल 24 घंटे चालू नहीं रहने, शहर में पुलिसकर्मियों की कमी, कोर्ट आदेश के बावजूद बीआरटीएस पूरी तरह से नहीं हटने, अवैध पार्किंग, सडक़ पर लगने वाले जाम, फुटपाथ और सडक़ पर होने वाले अवैध कब्जे जैसे कई मुद्दें शामिल किए गए हैं। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने बीआरटीएस का एक बड़ा हिस्सा तो हटा दिया है लेकिन शेष समस्याएं यथावत हैं।

पूर्व में याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग कमेटियां गठित की थी। इन कमेटियों ने शहर के यातायात सुधार के लिए कुछ सुझाव कोर्ट को दिए हैं। शुक्रवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागडिय़ा ने शहर में लग रहे जाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने शहर में बरसात के दौरान सडक़ों की बदहाल हालत को लेकर कोर्ट में दलील रखी। अभिभाषक मनीष यादव ने बदहाल सड़क और जगह-जगह पर हो रहे गड्ढ़ों की तस्वीरें भी पेश की।

कोर्ट को बताया गया कि सडक़ में होने वाले इन गड्ढों के कारण गाडिय़ों को चलने में भी दिक्कत हो रही है। इसी कारण से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाम की स्थिति बन रही है। मुख्य सड़कों पर तो शाम को घंटों जाम रहता है। ट्रेफिक जाम की तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गई। साथ ही कोर्ट में दलील दी गई कि हर साल बरसात शुरू होते ही ये स्थिति बन जाती है। नगर निगम इसका स्थाई हल निकालने के बजाए दिखावे की कार्रवाई करती है। इसका स्थाई हल निकालने के लिए कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है।

इस दौरान नगर निगम की ओर से दलील दी गई थी कि जैसे ही जानकारी मिलती है वैसे ही नगर निगम की ओर से सड़क सुधार का काम किया जाता है। हालांकि याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहरवासियों के पास खराब सडक़ों की शिकायत करने के लिए भी कोई सरल रास्ता भी नहीं है। जिसके बाद कोर्ट ने नगर निगम से पूछा कि जिस तरह से नगर निगम की मोबाइल एप्प पर गंदे पानी, कचरे की शिकायत के लिए व्यवस्था है तो उसी तरह से शहर की खराब सडक़ों, गड्ढों के फोटो डालकर शिकायत करने की व्यवस्था क्यों नहीं है?

वहीं कोर्ट ने शहर के यातायात को सुधारने और कोर्ट के पूर्व में जारी आदेशों का पालन करने के लिए क्या किया जा रहा है, क्या ठोस योजना बनाई गई है, इसके बारे में सरकार और नगर निगम के वकीलों से जवाब मांगा। वकीलों ने कहा कि वे अफसरों से जानकारी लेकर प्रस्तुत करेंगे। इस पर अब कोर्ट ने नगर निगम के वकीलों को दो दिन का समय दे दिया। 14 जुलाई की तारीख सुनवाई के लिए तय की। शहर के यातायात के लिए जिम्मेदार प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अफसरों को कोर्ट में पेश होने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी आदेश जारी किए हैं।

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