
उदय प्रताप सिंह, नईदुनिया, इंदौर : महंगी व लग्जरी कारों में लोग अपने बच्चे व परिवार की सुरक्षा को कई बार ताक में रख देते है। इससे उनके अपनों की जान पर बन आती है। कार में छोटे बच्चों को भी सीट बेल्ट पहनाए बिना ही बैठा दिया जाता है। इसी तह सनरूफ वाली कारों में अक्सर बच्चे कार में खड़े होकर सफर करते हैं। इस तरह के स्थितियां शहर की सड़कों पर अक्सर देखने को मिलती है, जिनमें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता है।
शनिवार को दिलीप नगर में स्पीड ब्रेकर को पार करने के दो कारों में टक्कर हुई और फ्रंट सीट के सामने खड़ा चार साल का बच्चा कार के सामने के कांच ये बाहर जा गिरा और उसकी मौत हो गई। इस तरह के हादसे में कोई मासूम जान न गवाएं और लोग लापरवाही न करें। इसके लिए नईदुनिया ने विशेषज्ञों से बात कर जाना कि आखिर कार सुरक्षा के वो कौन से फीचर व आदते है जो उसमें सफर करने वालों की सुरक्षा को सुरक्षित बनाती है। यदि कोई इसकी अनदेखी करता है तो ही जान जाती है।
सुरक्षा मानकों के अनुसार 135 सेमी से कम ऊंचाई या ढाई साल से कम उम्र वाले बच्चों को कार की पिछली सीट पर ही बैठाना चाहिए । 5 साल के बच्चे का शरीर और लंबाई सामान्य एडल्ट (वयस्क) सीट बेल्ट के हिसाब से छोटी होती है। इन्हें बूस्टर सीट या फारवर्ड-फेसिंग सीट बैठाना चाहिएं अगर साधारण सीट बेल्ट सीधे 5 साल के बच्चे को पहनाई जाए, तो वह बेल्ट उनके गले या पेट पर आती है, जो किसी भी ब्रेक या दुर्घटना के समय खतरनाक साबित हो सकती है।इसलिए, 5 साल के बच्चे के लिए हाई-बैक बूस्टर सीट या फारवर्ड-फेसिंग चाइल्ड कार सीट का उपयोग करना चाहिए।
यदि बच्चा बूस्टर सीट पर बैठा है और कार की 3-पाइंट सीट बेल्ट का उपयोग कर रहा है, तो बेल्ट की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि शोल्डर बेल्ट (ऊपरी बेल्ट): बच्चे की छाती और कंधे के बीच से गुजरनी चाहिए, गले या चेहरे पर नहीं।लैप बेल्ट (निचली बेल्ट) बच्चे की जांघों/कमर के निचले हिस्से पर कसकर लगनी चाहिए, पेट पर नहीं
कार में पिछली सीट पर बैठकर सफर करने वाले भी सीट बेल्ट नहीं लगाते है जो कि सही नहीं है। पिछली सीट पर बैठने वालों को भी सीट बेल्ट लगाना चाहिए। दुर्घटना के समय कार में झटका लगने पर वो भी चोटग्रस्त हो सकते है। कई कारों में तक अब पिछली सीट वालों की सुरक्षा के लिए भी एयर बलून आ रहे है।
अब नई कारों बच्चों के लिए आइसो फिक्स आ रही है। जिन कारों में नहीं है। उनमें बच्चों की सुरक्षा के लिए रियर फेसिंग सीट, फारवर्ड फेसिंग व बूस्टर सीट का उपयोग किया जाना चाहिए। इस सीट पर बैठने पर ही बच्चे की सुरक्षा दुर्घटना व आपात स्थिति में सुनिश्चित होती है। बच्चे को गोद में बैठाकर सफर करना सुरक्षित नहीं है। छोटे बच्चों पीछे की सीट पर बैठाना चाहिए। इसके अलावा उन्हें दो लोगों के बीच में बैठाना चाहिए। कार में पावर विंडो कंट्रोल व चाइल्ड लाक भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इसके अब कारों में गियर लिवर इंटर लॉक भी आ रहा है, ताकि बच्चा कार के गियर के साथ छेड़छाड़ न कर जो दुर्घटना का कारण बने। इसके अलावा कारों में ट्रक रिलीज सिस्टम भी आ गया है। नई कारों में सुरक्षा के नए फीचर आ रहे लेकिन पुरानी जिन कारों में यह फीचर नहीं है। उनमें कार चालक को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चत करना चाहिए। - विनोद पाराशर, असि प्रोफेसर, मैकेनिक इंजीनियर विभाग एसजीएसआईटीएस
भारत में मोटर वाहन अधिनियम और सुरक्षा नियमों के अनुसार कार में यात्रा करते समय सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है। वाहन अधिनियम की धारा 194 बी (2) के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को कार में बिना सीट बेल्ट के बैठाकर ले जाना गैर-कानूनी है। यदि बच्चा सीट बेल्ट नहीं लगाता या सुरक्षित कार सीट (चाइल्ड सेफ्टी सीट) में नहीं बैठा है, तो एक हजार रुपये के चालान का प्रावधान है। - संतोष कौल, एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक
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