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जबलपुर की सड़कों पर 40 ई-बसें और 52 सीएनजी टिपर, नवंबर में और बढ़ेंगे वाहन, ग्रीन सिटी की तरफ बढ़ रहे हैं कदम

जबलपुर को प्रदूषण मुक्त और हरित शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने डीजल वाहनों से दूरी बनाकर सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपने...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 10:41:26 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 10:41:26 PM (IST)
जबलपुर की सड़कों पर 40 ई-बसें और 52 सीएनजी टिपर, नवंबर में और बढ़ेंगे वाहन, ग्रीन सिटी की तरफ बढ़ रहे हैं कदम
डीजल खर्च से राहत पाने CNG की ओर बढ़ा निगम।

HighLights

  1. डीजल खर्च से राहत पाने CNG की ओर बढ़ा निगम
  2. नगर निगम के बेड़े में जुड़ेंगे 40 नए सीएनजी टिपर
  3. पंपों की कमी से हफ्ते का कोटा एक साथ भरवानया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर को प्रदूषण मुक्त और हरित शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने डीजल वाहनों से दूरी बनाकर सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर दिया है। पहली खेप में 40 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतर चुकी हैं, वहीं डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 52 सीएनजी वाहन (टिपर) भी दौड़ रहे हैं। लेकिन हरित परिवहन की इस पहल के सामने अब सीएनजी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

एक सप्ताह के कोटा फुल करा रहे हैं वाहन

दरअसल शहर में वर्तमान में महज छह सीएनजी पंप संचालित हैं। जबकि नगर निगम के करीब 52 कचरा परिवहन वाहन हैं। जो रोजाना सुबह-सुबह सफाई कार्य के लिए वार्डों में रवाना होते है। रोजाना सीएनजी भरवाने के लिए पंपों पर भेजना निगम के लिए मुश्किल है। एक साथ कई वाहन पहुंचने पर लंबी कतार लगने के साथ यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी समस्या से बचने के लिए निगम ने वाहनों को रोज सीएनजी भरवाने के बजाय एक बार में करीब सप्ताहभर चलने वाली गैस भरवाने की व्यवस्था शुरू की है।


40 वाहन और बढ़ेंगे

नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक सीएनजी पंपों की सीमित संख्या को देखते हुए वाहनों में उनकी क्षमता के अनुसार एक साथ गैस भरवाई जा रही है। इससे वाहन बार-बार पंप पर नहीं पहुंचते और कचरा कलेक्शन का काम भी प्रभावित नहीं होता। साथ ही पंपों पर वाहनों की कतार और सड़क पर जाम की स्थिति से भी बचा जा रहा है।

सबसे बड़ी चुनौती आने वाले दिनों में सामने आ सकती है। नगर निगम के बेड़े में सीएनजी वाहनों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। कचरा परिवहन के लिए 40 और टिपर नवंबर माह में नगर निगम खरीद रहा है। ऐसे में मौजूदा छह पंपों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। यदि वाहनों की संख्या के अनुपात में सीएनजी पंप नहीं बढ़े तो ईंधन भरवाने में लगने वाला समय बढ़ सकता है और कचरा परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

450 वाहनों पर हर माह 1.60 करोड़ का डीजल खर्च

नगर निगम के बेड़े में फिलहाल करीब 450 वाहन हैं। इनके संचालन पर हर महीने लगभग 1.60 करोड़ रुपए डीजल पर खर्च हो रहे हैं। निगम का मानना है कि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से डीजल पर होने वाला खर्च कम होगा। साथ ही प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।

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बेड़े में बढ़ रहे सीएनजी वाहन

  • 40 इलेक्ट्रिक बसें पहली खेप में शामिल
  • 52 सीएनजी वाहन कचरा कलेक्शन में लगे
  • 6 सीएनजी पंप शहर में संचालित
  • 450 नगर निगम के कुल वाहन
  • 1.60 करोड़ रुपये हर माह डीजल पर खर्च

सीएनजी पंप शहर में कम है। ऐसे में सीएनजी वाहनों में रोजाना गैस भरवाने में संभव नहीं इसलिए क्षमता अनुसार वाहनों में एक साथ ही सीएनजी भरवाई जा रही है।- जीएस मरावी, कार्यपालन यंत्री व वर्कशाप प्रभारी, नगर निगम