जबलपुर के एसएएफ घोटाले में एक और खुलासा, 50 प्रतिशत कमीशन पर होता था बंटवारा
आरक्षकों के खाते तक तो राशि ऑनलाइन पहुंचती थी, लेकिन उसके बाद लेन-देन का खेल नकद में होता था। भत्ता शाखा का बाबू आरोपितों से गबन की राशि का 50 प्रतिशत ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Mar 2026 02:00:26 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Mar 2026 02:15:52 PM (IST)
विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की रांझी स्थित छठवीं बटालियन की फाइल फोटो।HighLights
- बटालियन में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा राशि के भत्ता घोटाले के प्रमाण मिले हैं
- डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की कमीशन राशि की बंदरबांट हुई थी
- 2018-19 से जाली बिलों से सरकारी राशि के अवैध आहरण का पता चला
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की रांझी स्थित छठवीं बटालियन में यात्रा भत्ता घोटाले की राशि में 50 प्रतिशत हिस्सा कमीशन का होता था। इस राशि का भत्ता प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदारों के बीच बराबर वितरण होता था। घोटाला का फरार आरोपित बटालियन का लिपिक सत्यम शर्मा कमीशन की 50 प्रतिशत राशि एकमुश्त प्राप्त करता था। उसके बाद एक हिस्सा वह खुद अपने पास रखकर बाकी राशि सहयोगियों में बांट देता था।
आरोपी सत्यम के इशारे पर ही जाली बिलों से यात्रा भत्ता की राशि के भुगतान का ओटीपी जारी होता था। संगठित तरीके से चल रहे फर्जीवाड़े की बारीकी से जांच होने पर भुगतान प्रक्रिया से जुड़े कई जिम्मेदारों के चेहरे बेनकाब होने की संभावना है। रांझी पुलिस को विस्तृत छानबीन का जिम्मा सौंपा गया है। लेकिन मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया मंद है।
संगठित खेल, नकद में लेनदेन
स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल (एसएफआईसी) की जांच में बटालियन में सामने आया भत्ता घोटाला संगठित खेल माना जा रहा है। फर्जी बिलों से सरकारी राशि के गबन में शामिल बटालियन के कर्मचारी एवं अधिकारी शातिर हैं। वे कुछ आरक्षकों के साथ मिलकर जाली बिलों से सरकारी राशि का गबन कर रहे थे।
आरक्षकों के खाते तक तो राशि ऑनलाइन पहुंचती थी, लेकिन उसके बाद लेन-देन का खेल नकद में होता था। भत्ता शाखा का बाबू आरोपितों से गबन की राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा नकद वसूलता था। धांधली में लिप्त अन्य जिम्मेदारों तक उनका हिस्सा नकद पहुंचता था।
डेढ़ करोड़ से ज्यादा कमीशन
प्रारंभिक जांच में बटालियन में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा राशि के भत्ता घोटाले के प्रमाण मिले हैं। जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा यानी डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की कमीशन राशि की बंदरबांट हुई है। अभी तक जांच में वर्ष 2018-19 से जाली बिलों से सरकारी राशि के अवैध आहरण का पता चला है। विस्तृत जांच में घोटाले की राशि और बढ़ सकती है।
एक खाते में एक दिन में कई बार भुगतान
यात्रा भत्ता बिलों के परीक्षण से लेकर भुगतान प्रक्रिया की जांच एवं निगरानी के लिए बटालियन में अधिकारी एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। इन समस्त चरणों से जाली बिल और भुगतान की प्रक्रिया निरंतर होती है। कुछ कर्मियों के बैंक खाते में एक दिन में कई बार भुगतान की बात भी सामने आई है, जिससे सभी की भूमिका संदिग्ध हो गई है।
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