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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जब क्रूज रवाना हुआ, तब मौसम सामान्य था। हल्की हवा हो रही थी, लेकिन कुछ ही देर में हालात अचानक बदल गए, तेज आंधी, ऊंची लहरें और पलों में मौसम बदल गया। मैंने पूरी कोशिश की कि क्रूज को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया जाए, लेकिन कुदरत ने मौका ही नहीं दिया। यह बात कहते हुए क्रूज के पायलट महेश पटेल फफक-फफक कर रो पड़े।
शाम की घटना से उभर नहीं पा रहे
बरगी डैम क्रूज हादसे के दो दिन बाद सामने आए महेश 30 अप्रैल की शाम की घटना से उभर नहीं पा रहे हैं। चर्चा में उन्होंने कहा कि पिछले 3 दिन से मैंने कुछ नहीं खाया है। सारे सीन मेरी आंखों के सामने बार-बार आ रहे हैं। मुझे नींद तक नहीं आ रही है। मुझे इसका काफी अफसोस है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि किसी को भी इस प्रकार की स्थिति का सामना न करना पड़े। वहीं, घटना के वक्त मौसम की चेतावनी के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं कि मुझे मौसम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। मेरा क्रूज किसी चीज से नहीं टकराया। मैंने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किया लेकिन पलटने से नहीं रोक पाया।
यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाने बोला था
पायलट बताते हैं कि जैसे ही लहरें तेज हुईं, तुरंत सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाने के निर्देश दिए गए। रेस्क्यू के लिए फोन किया गया, इसी दौरान इंजन रूम में पानी भरने लगा और कुछ ही मिनटों में यह साफ हो गया कि क्रूज अब किनारे तक नहीं पहुंच पाएगी। वीडियो में वो पल भी दिखते हैं जब डगमगाती नाव में यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाई जा रही है। महेश का कहना है कि उन्होंने आखिरी क्षण तक यात्रियों को बचाने की कोशिश की। जब नाव पलटने की स्थिति में आई, तब पहले सभी यात्रियों को बाहर निकलने दिया और खुद सबसे आखिर में पानी में उतरे।
जब क्रूज पलटा किनारे से करीब 60 मीटर दूर था
उन्होंने आगे कहा कि सभी लोगों को लाइफ जैकेट दी गई थीं, लेकिन कुछ लोग नाच रहे थे और उन्होंने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। फिर अचानक, क्रूज बोट में पानी भर गया और मैं उस समय किसी भी तरह किनारे पर लंगर नहीं डाल पाया। आखिरकार क्रूज पलट गया। तब हम किनारे से 50-60 मीटर दूर थे।
इतना भयानक तूफान पहले कभी नहीं देखा
करीब 20 साल से नाव चला रहे महेश कहते हैं कि उन्होंने अपने करियर में कई बार खराब मौसम देखे हैं, लेकिन इतना भयानक तूफान पहले कभी नहीं देखा। वह मानते हैं कि इस हादसे का दर्द उनके दिल पर हमेशा रहेगा। ठीक से खा नहीं पा रहे, सो नहीं पा रहे और हर वक्त उन्हीं लोगों के चेहरे आंखों के सामने आते रहते हैं, जो इस हादसे में नहीं बच सके। उन्होंने हादसे के लिए पीड़ित परिवारों से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी है। उनका कहना है कि अपनी पूरी क्षमता से यात्रियों को बचाने की कोशिश की और अगर उनसे कोई कमी रह गई हो, तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।