
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सांई मंदिर सिविल लाइन्स निवासी मनोज सेन को क्या पता था कि गुरुवार को उनकी पत्नी हमेशा-हमेशा के लिए उनसे बिछड़ जाएगी। आज भले ही ज्योति सेन स्वर्ग सिधार चुकीं हैं, लेकिन परिवार को रोता छोड़ गईं। बरगी डैम क्रूज हादसे ने उनकी जान ले ली। मेडिकल कॉलेज कैजुअल्टी के बाहर पत्नी के शव के पास खड़े मनोज ने नईदुनिया को रोते-रोते हुए बताया कि जिस वक्त क्रूज बरगी डैम की सैर को निकला, उसके ठीक बाद नीचे के फ्लोर पर पानी भरने लगा था। इसी दौरान तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। मैंने क्रू सदस्यों से इस बारे में शिकायत करते हुए कहा कि भैया क्रूज में नीचे पानी भर रहा है, कुछ करो। तब क्रूज सदस्यों ने कहा घबराओ मत ऊपर आ जाओ। लेकिन संभलने का मौका ही नहीं मिला और क्रूज डूबने लगा तो मैंने बेटे को लेकर किसी तरह बच पाया। अफसोस की धर्मपत्नी छूट गई।
कामराज परिवार के सात सदस्य क्रूज में सवार थे। जिसमें ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में सेवारत 36 साल के आर कामराज, बेटा तमिल व साला मयूरन अब भी लापता हैं। जबकि पत्नी 38 साल की कार्यकुलम व भाभी 37 साल की भाग्ययम की मौत हो चुकी है। वहीं बेटा पुतिथरन व बेटी शनिकम सुरक्षित हैं। बिखरे परिवार को संभालने वाला कोई नहीं था, ऐसे में साथी कर्मचारी अर्नव दासगुप्ता, वीरेंद्र सेन सहित चार लोग पहले हादसे वाले स्थान पर मौजूद रहे। फिर दोनों बच्चों को किसी तरह समझा बुझाकर सुरक्षित घर भेजा। कामराज के सहयोगी अर्नव के अनुसार क्रूज में 40 से अधिक लोग सवार थे। आंधी चली तो क्रूज डगमगाकर पानी में डूबने लगा और ऐसे में लोग ऊपर को भागे। इसी आपाधापी में लोग एक दूसरे से जान की भीख मांगते दिखे।
भैया 50 से अधिक लोग क्रूज में थे: पाटन बायपास निवासी 11 साल के तनिष्क, बहन 14 वर्षीय तनिष्का के साथ क्रूज में सवार थे। पिता राजेश उन्हें क्रूज की सैर कराने पहली बार ले गए थे। हादसे में वे सभी बच गए। इन्हें मामूली चोट के कारण मेडिकल में एक दिन के लिए भर्ती किया गया था, और स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इन्होंने बताया कि हादसे के वक्त क्रूज में 50 से ज्यादा लोग सवार थे। यह थोड़ा चला ही था कि आंधी में बहुत तेज हिलने लगा था। हम डर गए, पिता ने हमें सहारा दिया। कोई बचाव के साधन नहीं थे। जो भी बचे वह राहत दल आया उनकी मदद से।
लहर बहुत तेज थी, पानी में डूबने लगा था: कोतवाली निवासी अनामिका व समृद्धि जिस वक्त क्रूज डूब रहा था किस तरह भागकर ऊपर आई और जान बचाने में सफल रहीं। दोनों ही बहनों ने बताया कि जिस वक्त एकाएक मौसम बदला तो लहर बहुत तेज थी, क्रूज पानी में डूबने लगा था और यह भयावह मंजर देख अंदर चीख पुकार मचने लगी थी। सभी एक दूसरे से मदद की गुहार लगा रहे थे। दो फ्लोर के इस क्रूज में हम उस वक्त नीचे की तरफ थे। घबराए हुए ऊपर और किसी तरह राहत नजर आई, बचाव नौका ने हमें खींच लिया। भागम भाग में हमने लाइफ जैकेट मांगकर पहना था।
क्रूज में काफी भीड़ थी, लगभग 60 से 65 लोग सवार थे: उस डरावने हादसे को याद करते हुए एडवोकेट आनंद ने बताया कि यात्रा शाम करीब 5:15 बजे शुरू हुई थी। शुरुआत में मौसम शांत था, लेकिन सुरक्षा में भारी खामियां तुरंत नजर आ रही थीं। आनंद ने कहा, किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई। वापसी की यात्रा के दौरान, किनारे से महज आधा किलोमीटर दूर, जब मौसम ने अचानक रौद्र रूप ले लिया, तब यह हादसा हुआ। घबराहट में, नाव का ड्राइवर अपना संतुलन खो बैठा और चौंकाने वाली बात यह रही कि वह यात्रियों को उनके हाल पर छोड़कर ड्राइवर अपनी जान बचाने के लिए कूद गया।
जब डबल-डेकर क्रूज बुरी तरह डगमगाने लगा, तो आनंद ने यात्रियों से जहाज को स्थिर करने के लिए निचले डेक पर जाने का आग्रह किया। जल्द ही, नाव का एक कोना टूट गया और पानी अंदर भरने लगा। हताश यात्रियों ने पानी बाहर निकालने के लिए डस्टबिन खाली करके उनका इस्तेमाल किया, लेकिन जहाज में तेजी से पानी और वजन बढ़ने लगा था। अंततः जब नाव पलट गई, तो अफरा-तफरी मच गई। आनंद ने बताया कि उन्हें अपनी पत्नी के साथ डूबते केबिन से बाहर निकलने के लिए कांच की खिड़की तोड़नी पड़ी। वह पलटे हुए क्रूज की रेलिंग पर खड़े अंतिम व्यक्ति थे, जो डूबते हुए लोगों को पानी से बाहर खींचने की हताश कोशिश कर रहे थे।
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