
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नर्मदा तट गौरीघाट और तिलवारा घाट से भिक्षुकों को स्थानांतरित करते हुए उनके पुनर्वास के प्रयास भी किए जा रहे हैं। जो सफल होते दिख रहे हैं। नगर निगम का दावा है कि चिन्हित कुल 367 भिक्षुओं में से 85 प्रतिशत को सफलतापूर्वक अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया है। बचे हुए भिक्षुकों को भी जल्द ही यहां से अलग कर समाज की मुख्यधारा और आजीविका से जोड़ने का प्रयास जारी है।
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देशन में नर्मदा तटों को भिक्षुक मुक्त करने के लिए सबसे पहले तटों पर रहने वाले भिक्षुकों की पहचान कर उन्हें चिंहित कर सूचीबद्ध किया गया। इसके बाद उनकी काउंसलिंग की गई।
शहर के आस-पास के रहवासी थी और किन्हीं कारणों से अपना घर छोड़कर नर्मदा घाट पर ही जम गए थे उन्हें समझाइश देकर वापस भेजा गया। इसी तरह जो दिव्यांग व बुर्जुग व जरूरतमंद थे उन्हें आस-पास के वृद्ध आश्रम व आश्रय स्थलों में शिफ्ट कर दिया गया। जहां उनके पुर्नवास की व्यवस्था की गई।
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कहा जा रहा है कि अभी तक 85 प्रतिशत भिक्षुकों को यहां से शिफ्ट किया जा चुका है जल् ही नर्मदा तटों को पूरी तरह से भिक्षुक मुक्त कर दिया जाएगा।
विदित हो कि नर्मदा के उमाघाट, दरोगाघाट, जिलहरी घाट सहित अन्य घाटों की सीढ़ियों में भिक्षुकों ने अस्थाई टपरिया बनाकर रह रहे थे। भिक्षुकों के कारण नर्मदा तटों की स्वच्छता बाधित हो रही थी। श्रद्धालु भी असहज महसूस करते थे। सौंदर्यीकरण भी प्रभावित होता था।
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नर्मदा तट के ऊपर खाली जगह पर नगर निगम ने नवाचार करते हुए ‘थ्री आर’ (रिड्यूस ,रीयूज, रीसाइकिल)सेंटर भी बनाया है। प्रमुख रूप से खिलौना बैंक सक्षम परिवारों द्वारा दिए गए पुराने खिलौने यहां जमा होंगे, जिन्हें जरूरतमंद बच्चों को वितरित किया जाएगा।
बर्तन बैंक एकल उपयोग वाले प्लास्टिक को कम करने के लिए यहां से आयोजनों के लिए बर्तन उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं पुस्तक बैंक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्र यहां अपनी पुरानी किताबें दान कर सकेंगे और जरूरतमंद विद्यार्थी उन्हें ले सकेंगे। इसी तरह थैला बैंक भी होगा। नर्मदा तट को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए यहां कपड़े के थैले उपलब्ध होंगे।
नर्मदा तटों को भिक्षुक मुक्त बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें हम सिर्फ उन्हें हटा नही रहे बल्कि उनका पुर्नवास भी कर रहे हैं। जो सक्षम है उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अभी तक लगभग 85 प्रतिशत भिक्षुकों को शिफ्ट किया जा चुका है।
अंकिता जैन, सहायक आयुक्त
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